
NEET-PG 2025: मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार और NBEMS ने NEET-PG 2025 की तीसरे राउंड की काउंसलिंग के लिए कट-ऑफ में भारी कमी की है, जिससे अब बेहद कम अंकों वाले अभ्यर्थी भी पोस्ट ग्रेजुएशन मेडिकल सीटों के लिए पात्र हो गए हैं।
देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-PG 2025 को लेकर केंद्र सरकार और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने एक अभूतपूर्व फैसला लिया है। तीसरे राउंड की काउंसलिंग से पहले कट-ऑफ में की गई इस भारी कटौती के बाद अब वे उम्मीदवार भी PG मेडिकल सीटों के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिनके अंक बेहद कम हैं। कुछ आरक्षित वर्गों में तो नेगेटिव मार्क्स प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को भी काउंसलिंग में शामिल होने की अनुमति दे दी गई है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह निर्णय देश की मेडिकल शिक्षा प्रणाली में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर चिकित्सकों और मेडिकल संगठनों के बीच बहस छिड़ गई है।
NEET-PG 2025: कट-ऑफ क्यों घटाया गया?
सरकार और NBEMS का कहना है कि NEET-PG 2025 के पहले और दूसरे राउंड की काउंसलिंग के बाद भी देशभर में हजारों पोस्ट ग्रेजुएशन मेडिकल सीटें खाली रह गई थीं। तीसरे राउंड तक पहुंचने पर भी कई प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में छात्रों की कमी बनी हुई थी। एक ओर देश में योग्य डॉक्टरों की निरंतर आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर हजारों ट्रेनिंग सीटें खाली पड़ी रहना एक गंभीर विरोधाभास था। इसी स्थिति को सुधारने और अधिक से अधिक उम्मीदवारों को काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर देने के लिए यह `कट-ऑफ` घटाने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया है, ताकि इन खाली सीटों को भरा जा सके।
पात्रता मानदंड में महत्वपूर्ण बदलाव
13 जनवरी 2026 से पहले तक, NEET-PG में क्वालीफाई करने के लिए एक न्यूनतम `कट-ऑफ` निर्धारित थी। विभिन्न श्रेणियों के लिए यह पात्रता मानदंड इस प्रकार था:
- जनरल और EWS वर्ग के लिए: 50वां परसेंटाइल (लगभग 800 में से 276 अंक)
- PwBD (जनरल) के लिए: 45वां परसेंटाइल (लगभग 255 अंक)
- SC, ST और OBC वर्ग के लिए: 40वां परसेंटाइल (लगभग 235 अंक)
इसका अर्थ था कि PG में दाखिला पाने के लिए कम से कम 235 अंक अनिवार्य थे।
नए नियम लागू: अब क्या है पात्रता?
NBEMS द्वारा जारी नए नोटिस के बाद, पात्रता मानदंड में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब नए कट-ऑफ इस प्रकार हैं:
- जनरल और EWS वर्ग के लिए: 7वां परसेंटाइल (लगभग 103 अंक)
- PwBD (जनरल) के लिए: 5वां परसेंटाइल (लगभग 90 अंक)
- SC, ST और OBC वर्ग के लिए: शून्य परसेंटाइल (माइनस 40 अंक तक भी मान्य)
हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि यह परिवर्तन केवल काउंसलिंग में भाग लेने की पात्रता के लिए है। NEET-PG 2025 की ओवरऑल रैंक या मेरिट सूची में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सीटें खाली रहने के प्रमुख कारण
मेडिकल विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी सीटें खाली रहने के पीछे कई जटिल कारण हैं:
- **उच्च शुल्क:** कई निजी मेडिकल कॉलेजों में PG कोर्स की फीस बहुत अधिक होती है, जिसे सामान्य और मध्यम वर्ग के परिवार वहन नहीं कर पाते।
- **सरकारी बॉन्ड:** कुछ राज्यों में PG पूरी करने के बाद सरकारी बॉन्ड की लंबी अवधि की शर्त होती है, जिसमें दुर्गम या कठिन क्षेत्रों में पोस्टिंग अनिवार्य होती है।
- **कठिन शाखाएँ:** सर्जरी, एनेस्थीसिया और कुछ अन्य शाखाओं में काम का दबाव अत्यधिक होता है और कानूनी जोखिम भी अधिक रहता है, जिसके कारण छात्र इन विषयों से दूरी बना रहे हैं।
- **कार्य स्थिति:** जूनियर डॉक्टरों के लिए ट्रेनिंग के दौरान काम के लंबे घंटे, सुरक्षा की कमी और कार्यस्थल पर तनाव भी एक बड़ी समस्या है।
इन सभी कारणों से सीटें खाली रह जाती हैं, और सरकार को इस तरह का बड़ा कदम उठाना पड़ा।
फैसले का मेडिकल जगत पर असर
इस फैसले के बाद चिकित्सा समुदाय में गहन बहस छिड़ गई है। कई डॉक्टर संगठनों का तर्क है कि पोस्ट ग्रेजुएशन में दाखिला लेने वाले छात्र ही भविष्य के विशेषज्ञ डॉक्टर बनते हैं। यदि प्रवेश का स्तर इतना नीचे चला जाता है, तो लंबी अवधि में चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
वहीं, सरकार का प्रतिवाद है कि सभी उम्मीदवार पहले से ही MBBS स्नातक हैं और उनकी बुनियादी चिकित्सा शिक्षा पूरी हो चुकी है। रैंकिंग प्रणाली में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस कदम का मूल उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि देश में डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए खाली पड़ी सीटों पर पढ़ाई शुरू हो सके। लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/education/। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
NEET-PG भारत की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण मेडिकल परीक्षाओं में से एक है। MBBS की पढ़ाई पूरी करने के बाद ही डॉक्टर इस परीक्षा के माध्यम से पोस्ट ग्रेजुएशन में प्रवेश लेते हैं। NEET-PG को पास करने के बाद ही डॉक्टर MD, MS जैसे महत्वपूर्ण कोर्स कर पाते हैं और भविष्य में सुपर स्पेशलिटी की दिशा में आगे बढ़ते हैं।



