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फ़रवरी, 11, 2026
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Bokaro News: DC Ajay Nath Jha की मकर संक्रांति… दिव्यांग बच्चों और वृद्धजनों से मानवीय स्पर्श, पर्व एक नए अर्थ से…

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Bokaro News: रिश्तों की डोर में जब संवेदना के धागे पिरोए जाते हैं, तो हर पर्व एक नए अर्थ से भर उठता है। मकर संक्रांति का पावन अवसर इसी मानवीय स्पर्श का गवाह बना, जहाँ एक प्रशासनिक मुखिया ने अपने पद की गरिमा के साथ-साथ हृदय की पवित्रता का भी परिचय दिया।

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Bokaro News: उपायुक्त ने दिव्यांग बच्चों और वृद्धजनों संग मनाई मकर संक्रांति, पेश की मानवता की मिसाल

Bokaro News: बोकारो में सेवा और संवेदना का अनूठा संगम

बोकारो में मकर संक्रांति का पर्व इस बार कुछ ख़ास रहा। सेक्टर 05 स्थित मानव सेवा आश्रम में दिव्यांग बच्चों और सोलगडीह के बाबा बैद्यनाथ वृद्ध आश्रम में रह रहे वृद्धजनों के चेहरे पर रौनक लाने के लिए स्वयं उपायुक्त अजय नाथ झा पहुँचे। उन्होंने इन आश्रमों में पहुँचकर न सिर्फ़ पर्व की खुशियाँ साझा कीं, बल्कि मानवता और संवेदनशीलता की एक नई मिसाल भी पेश की। यह दृश्य अपने आप में एक संदेश था कि आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।Bokaro News: DC Ajay Nath Jha की मकर संक्रांति... दिव्यांग बच्चों और वृद्धजनों से मानवीय स्पर्श, पर्व एक नए अर्थ से...उपायुक्त ने बड़ी आत्मीयता से आश्रमवासियों के बीच पारंपरिक तिलकुट, दही-चूड़ा और गुड़ का वितरण किया। पर्व की इस सादगी और अपनेपन से भरे आयोजन ने पूरे आश्रम परिसर को भावनात्मक रूप से सराबोर कर दिया। वे बच्चों और वृद्धजनों से खुलकर बातचीत करते रहे, उनकी जीवन-कहानियों, दैनिक ज़रूरतों और भावनाओं को बड़ी गंभीरता से सुना।Bokaro News: DC Ajay Nath Jha की मकर संक्रांति... दिव्यांग बच्चों और वृद्धजनों से मानवीय स्पर्श, पर्व एक नए अर्थ से...उपायुक्त का मानना था कि मकर संक्रांति केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं है, बल्कि यह सेवा भाव, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रतीक भी है।देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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सामाजिक उत्तरदायित्व की नई परिभाषा

इस प्रेरक कार्यक्रम में उपायुक्त की धर्मपत्नी श्रीमती प्रतिमा झा की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने भी आश्रम में रहने वाले लोगों से स्नेहपूर्वक संवाद किया और उन्हें पारिवारिक अपनत्व का एहसास कराया। श्रीमती झा की मौजूदगी ने इस आयोजन में और भी मिठास घोल दी, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। प्रशासन के मुखिया और उनके परिवार का यह सहज व्यवहार समाज में एक सशक्त संदेश दे गया। यह आयोजन प्रशासन और जनसामान्य के बीच मानवीय संबंधों को मज़बूत करने वाला एक प्रेरणादायी प्रयास साबित हुआ, जो हर किसी को ‘सेवा ही धर्म’ के मूल मंत्र की याद दिलाता है। समाज में इस तरह के आयोजनों से सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा मिलता है और वंचित वर्ग को यह एहसास होता है कि समाज उनके साथ खड़ा है।

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