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मार्च, 5, 2026
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मासिक शिवरात्रि 2026: जानें व्रत के नियम, पूजा विधि और महत्व

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Masik Shivratri 2026: माघ मास की कृष्ण चतुर्दशी तिथि को पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि का व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है, जो भक्तों को सुख-समृद्धि और मनोवांछित फल प्रदान करने वाला माना जाता है। यह दिन भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र और फलदायी होता है।

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मासिक शिवरात्रि 2026: जानें व्रत के नियम, पूजा विधि और महत्व

मासिक शिवरात्रि 2026 व्रत में क्या करें और क्या न करें

माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि भगवान शिव को समर्पित होती है, जिसे मासिक शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर शिव भक्त श्रद्धापूर्वक व्रत रखते हैं और भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। यह व्रत जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। इस दिन की जाने वाली पूजा विधि का विशेष महत्व है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह व्रत विधि-विधान से करने पर भगवान शिव का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त होता है।

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मासिक शिवरात्रि की संपूर्ण पूजा विधि

  • प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • घर के मंदिर या पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
  • भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित करें।
  • भगवान शिव का जलाभिषेक करें और उन्हें बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, सफेद चंदन, अक्षत, फल, फूल आदि अर्पित करें।
  • माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
  • दीपक प्रज्वलित कर धूप और अगरबत्ती लगाएं।
  • शिव चालीसा का पाठ करें और शिव मंत्रों का जाप करें।
  • व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
  • पूजा के अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
  • पूजा के बाद प्रसाद वितरण करें।
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मासिक शिवरात्रि 2026: शुभ मुहूर्त

तिथिसमय
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ16 जनवरी 2026, सुबह 03:00 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त17 जनवरी 2026, सुबह 02:40 बजे
निशिता काल पूजा16 जनवरी 2026, रात 12:05 बजे से 12:59 बजे तक

मासिक शिवरात्रि का महत्व

मासिक शिवरात्रि का व्रत बहुत ही पुण्य फलदायी माना जाता है। इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ऐसा माना जाता है कि मासिक शिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, इसलिए इस दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करने से अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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भगवान शिव के मंत्र

ॐ नमः शिवाय॥

महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

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उपाय और निष्कर्ष

मासिक शिवरात्रि का व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक अद्भुत अवसर है। इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। व्रत के नियमों का पालन करते हुए भगवान शिव की आराधना करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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