
Magh Gupt Navratri 2026: माघ मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से आरंभ होने वाली गुप्त नवरात्रि का समय आध्यात्मिक उन्नति और गोपनीय इच्छाओं की पूर्ति के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों और दस महाविद्याओं को समर्पित होते हैं, जहां साधक विशेष साधनाओं द्वारा अलौकिक शक्तियों और मनोवांछित फलों की प्राप्ति करते हैं।
माघ गुप्त नवरात्रि 2026: मां दुर्गा की विशेष कृपा पाने का महापर्व
Magh Gupt Navratri 2026 का आध्यात्मिक महत्व और पूजा विधि
शक्ति, साहस और विजय की प्रतीक मां दुर्गा सिंह पर आरूढ़ होकर अधर्म का नाश करती हैं और धर्म की स्थापना करती हैं। उनकी आराधना से भय दूर होता है और जीवन में सुख-समृद्धि के साथ सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस काल में की गई तंत्र साधना और मंत्र जाप अत्यंत फलदायी होते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। गुप्त नवरात्रि में देवी के उग्र स्वरूपों की पूजा की जाती है, जो गोपनीय सिद्धियों और विशिष्ट मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए विशेष मानी जाती है। यह पर्व उन साधकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो आध्यात्मिक गहराइयों में उतरना चाहते हैं।
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घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और विधि
माघ गुप्त नवरात्रि का आरंभ मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को होगा। इस दिन कलश स्थापना की जाएगी। गुप्त नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व है, जो शुभ मुहूर्त में ही की जानी चाहिए।
| पर्व | तिथि | शुभ मुहूर्त | अवधि |
|---|---|---|---|
| माघ गुप्त नवरात्रि आरंभ | मंगलवार, 20 जनवरी 2026 | प्रातः काल में शुभ चौघड़िया के अनुसार (उदाहरण: 09:30 AM – 10:30 AM) | 1 घंटा |
| कलश स्थापना (घटस्थापना) | 20 जनवरी 2026 (प्रतिपदा तिथि) | स्थानीय पंचांग अनुसार अभिजीत या शुभ चौघड़िया मुहूर्त | पंचांगानुसार |
(नोट: उपरोक्त मुहूर्त एक उदाहरण है। सटीक समय के लिए अपने स्थानीय पंचांग का अवश्य परामर्श लें।)
कलश स्थापना (घटस्थापना) और पूजा विधि
गुप्त नवरात्रि में घटस्थापना के साथ ही देवी के विशेष पूजन का क्रम आरंभ हो जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसकी विधि इस प्रकार है:
- सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें और एक साफ चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं।
- एक मिट्टी के पात्र में जौ बोएं और उसे चौकी के मध्य स्थापित करें।
- एक मिट्टी या तांबे के कलश पर स्वास्तिक बनाकर उसके मुख पर कलावा बांधें।
- कलश में जल, गंगाजल, सुपारी, सिक्का, अक्षत, लौंग, इलायची और दूर्वा डालें।
- कलश के मुख पर आम के पत्ते लगाकर उस पर नारियल रखें, जिसे लाल चुनरी से लपेटा गया हो।
- इस कलश को जौ के पात्र पर स्थापित करें।
- मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- घी का दीपक प्रज्ज्वलित करें और संकल्प लें।
- नवरात्रि के नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाने का विधान है।
- प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ और देवी के मंत्रों का जाप करें।
गुप्त नवरात्रि का महत्व और फल
गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिकों, अघोरियों और सन्यासियों द्वारा गोपनीय इच्छाओं की पूर्ति के लिए मनाई जाती है। यह पर्व धन, संतान, शत्रु विजय और आरोग्य जैसी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। इन दिनों में मां दुर्गा के साथ-साथ दस महाविद्याओं – काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला – की भी आराधना की जाती है। इन देवियों की कृपा से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दौरान की गई साधना सामान्य नवरात्रि की पूजा से कहीं अधिक फलदायी मानी जाती है।
मां दुर्गा का महामंत्र
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
निष्कर्ष एवं उपाय
माघ गुप्त नवरात्रि का यह पावन पर्व हमें आंतरिक शक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर प्रदान करता है। इन नौ दिनों में सच्चे मन से की गई आराधना और अनुष्ठान निश्चित रूप से आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएंगे। यदि आप किसी विशेष इच्छा की पूर्ति चाहते हैं, तो इन दिनों में संबंधित देवी के बीज मंत्र का जाप करें। घर में सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रतिदिन मां दुर्गा के समक्ष घी का दीपक जलाएं और लाल पुष्प अर्पित करें।
माघ गुप्त नवरात्रि 2026 में देवी की कृपा प्राप्त कर अपने जीवन को सफल बनाएं।







