मकर संक्रांति: मधुबनी की पावन धरती, जहां कला और संस्कृति की धाराएँ सदियों से बहती रही हैं, इस बार मकर संक्रांति के अवसर पर एक अद्भुत संगम की साक्षी बनी। मिथिला के हृदय में सांस्कृतिक चेतना का जो दीप जला, उसकी लौ ने पूरे वातावरण को रोशन कर दिया।
मधुबनी में मकर संक्रांति महोत्सव का भव्य आगाज: कला और संस्कृति का महाकुंभ
मधुबनी, 15 जनवरी 2026। गुरुवार को मिथिला चित्रकला संस्थान, सौराठ में कला एवं संस्कृति विभाग तथा जिला प्रशासन, मधुबनी के संयुक्त तत्वाधान में “मकर संक्रांति महोत्सव” का भव्य आयोजन किया गया। इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य मिथिला की समृद्ध कला-संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर बढ़ावा देना तथा जनमानस को हमारी गौरवशाली शास्त्रीय परंपराओं से जोड़ना रहा।
आयोजन का शुभारंभ अतिथियों के पारंपरिक पाग-दोपटा से स्वागत के साथ हुआ, जिसे जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्री नीतीश कुमार ने संपन्न किया। इसके उपरांत, जिला अपर समाहर्ता मुकेश रंजन झा, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी नीतीश कुमार, पद्मश्री बौआ देवी, पद्मश्री दुलारी देवी एवं पद्मश्री शिवन पासवान जैसे गणमान्य व्यक्तियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया। यह अवसर मिथिला की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने का एक महत्वपूर्ण क्षण था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मिथिला चित्रकला संस्थान में मकर संक्रांति महोत्सव की धूम
इस महोत्सव में शास्त्रीय संगीत, नृत्य और शास्त्रीय वाद्ययंत्रों पर आधारित एक से बढ़कर एक मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं, जिन्होंने उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया। स्वरागिनी फ्यूजन बैंड की ऊर्जावान प्रस्तुति के साथ, ऋषिकेश मिश्रा ने अपनी शास्त्रीय गायकी से और विवेक कुमार ने अपनी सूफी गायन शैली से समां बांध दिया। नृत्यार्पण कला आश्रम के कथक नृत्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया, वहीं शिवम मिश्रा की गजलों ने एक अलग ही रंग बिखेरा। इस सांस्कृतिक संध्या ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मिथिला कला और संगीत का गढ़ है।
वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियों में भी कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। डॉ. चंद्रशेखर झा और धीरज मिश्रा ने तबला वादन में, डॉ. रोहित कुमार झा ने सितार पर, सर्वोत्तम मिश्रा ने गिटार पर, पुरुषोत्तम मिश्रा ने पखावज जुगलबंदी में, मनीष मिश्रा ने बांसुरी पर, राहुल मनीष ने ऑक्टोपैड पर और सोनू कुमार ने पियानो पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इन सभी ने मिलकर एक अविस्मरणीय शास्त्रीय संगीत संध्या का निर्माण किया। कार्यक्रम के दौरान राग यमन, अहीर भैरव, भीम पलासी, ठुमरी, जुगलबंदी, जय-जय भैरवी सहित “आज जाने की ज़िद न करो” जैसी लोकप्रिय धुनों की प्रस्तुति हुई, जिसने पूरे वातावरण को संगीतमय कर दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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कलाकारों की अद्भुत प्रस्तुतियां: सुर और ताल का जादू
इस भव्य आयोजन में वरिष्ठ कलाकारों और बड़ी संख्या में उपस्थित कला प्रेमियों ने भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों को निरंतर जारी रखने की मांग की, ताकि मिथिला की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखा जा सके और नई पीढ़ी को इससे जोड़ा जा सके। डॉ. रानी झा, विभागीय कर्मचारी, संस्थान के छात्र-छात्राएं और अन्य कला प्रेमी इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिन्होंने इस सांस्कृतिक महाकुंभ का आनंद लिया।
कार्यक्रम का सफल मंच संचालन अनुज झा ने किया, और अंत में जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्री नीतीश कुमार ने सभी उपस्थित लोगों का धन्यवाद ज्ञापन कर महोत्सव का समापन किया। यह आयोजन न केवल कला को बढ़ावा देने में सफल रहा बल्कि इसने मधुबनी की सांस्कृतिक पहचान को भी एक नई ऊँचाई दी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

