Medical Negligence: जीवन बचाने वाले ही जब मौत का दूत बन जाएं, तब सवाल सिर्फ व्यवस्था पर नहीं, इंसानियत पर भी खड़े होते हैं। एक ऐसा ही हृदयविदारक मामला बिरौल से सामने आया है, जहां एक मरीज की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है।
Medical Negligence: परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप, जांच टीम गठित
दरभंगा जिले के बिरौल प्रखंड अंतर्गत रजवा गांव के रहने वाले 36 वर्षीय अजय सिंह की गुरुवार को सरकारी अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। इस घटना के बाद मृतक के परिजनों में कोहराम मच गया। उन्होंने बिरौल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के चिकित्सकों और कर्मचारियों पर इलाज में घोर लापरवाही का आरोप लगाया है। मृतक के भाई छोटू सिंह ने अस्पताल प्रभारी और बिरौल थाना को लिखित शिकायत दर्ज कराई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। छोटू सिंह ने अपने आवेदन में स्पष्ट रूप से कहा है कि उनके भाई अजय सिंह का टीबी रोग का उपचार सीएचसी बिरौल में 5 जनवरी, 2026 से चल रहा था।
परिवार का आरोप है कि इलाज शुरू होने के बाद से अजय सिंह की स्थिति लगातार बिगड़ती गई। 12 और 14 जनवरी को जब उन्हें दोबारा अस्पताल लाया गया, तो डॉक्टरों ने बताया कि दवा के ‘साइड इफेक्ट’ के कारण मरीज की तबीयत और गंभीर हो रही है। परिजनों का कहना है कि 15 जनवरी की सुबह जब अजय सिंह को बेहतर इलाज के लिए बिरौल अस्पताल ले जाया जा रहा था, तभी रास्ते में उनकी मौत हो गई।
परिजनों ने इसे सीधे तौर पर अस्पताल की गंभीर लापरवाही बताया है और आरोप लगाया है कि यह मौत इलाज कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों की उदासीनता का नतीजा है। उन्होंने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है ताकि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाएँ रोकी जा सकें। अस्पताल प्रशासन पर उठ रहे सवाल अब गंभीर होते जा रहे हैं।
इधर, अपर थानाध्यक्ष मुकेश कुमार ने बताया कि परिजनों की शिकायत पर यूडी (अननैचुरल डेथ) का मामला दर्ज कर लिया गया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए डीएमसीएच भेजा गया है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
जांच के घेरे में अस्पताल के डॉक्टर और कर्मी
इस बीच, अनुमंडलीय अस्पताल प्रभारी डॉ. योगेंद्र प्रसाद ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया है। इस टीम में डॉ. फूल बाबू मिश्रा, डॉ. संगीत कुमार और डॉ. नीतीश कुमार शामिल हैं।
जांच टीम को 48 घंटे के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है ताकि जल्द से जल्द सच्चाई सामने आ सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और न्याय की मांग तेज हो गई है।

