
Karnataka Gold Treasure: धरती ने उगला सदियों पुराना राज, जब एक छोटे से घर की नींव से निकली अतीत की चमक। सदियों से दबी कहानी अब सामने आ रही है, और कर्नाटक की धरती खजाना उगलने को तैयार है।
कर्नाटक के गडग जिले में स्थित ऐतिहासिक लक्कुंडी गांव, अपनी अद्वितीय स्थापत्य विरासत के लिए जग-प्रसिद्ध है। हाल ही में यहां एक घर के निर्माण के दौरान सोने के प्राचीन आभूषण मिलने के बाद, अब राज्य सरकार ने एक बड़े खजाने की व्यापक खोज शुरू कर दी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सरकार ने इस ऐतिहासिक लक्कुंडी गांव के कोटे वीरभद्रेश्वर मंदिर परिसर में बड़े पैमाने पर खुदाई का निर्णय लिया है।
पर्यटन विभाग, पुरातत्व विभाग, संग्रहालय एवं विरासत विभाग, लक्कुंडी विरासत विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन की टीमें मिलकर इस बहुप्रतीक्षित खजाने की खोज को अंजाम देंगी। अधिकारियों ने मंदिर परिसर में खुदाई के लिए आधुनिक मशीनें जैसे जेसीबी, ट्रक और ट्रैक्टर मंगवा लिए हैं। बताया जा रहा है कि इस प्रक्रिया के लिए 10 मीटर गुणा 10 मीटर का एक विशेष क्षेत्र निर्धारित किया गया है, जिसे आधिकारिक तौर पर खुदाई के लिए अधिसूचित भी कर दिया गया है। इस महत्वपूर्ण कार्य में 15 महिलाओं और पांच पुरुषों की टीम को नियुक्त किया गया है।
कर्नाटक गोल्ड ट्रेज़र: लक्कुंडी में व्यापक खुदाई का फैसला
यह निर्णय 470 ग्राम सोने के आभूषणों से भरे एक छोटे तांबे के बर्तन की खोज के बाद लिया गया है। ये बहुमूल्य आभूषण एक स्थानीय लड़के को मिले थे, जिनकी आयु लगभग 300 से 400 वर्ष पुरानी बताई जा रही है। लड़के ने अपनी ईमानदारी का परिचय देते हुए खोजे गए खजाने को तुरंत जिला प्रशासन को सौंप दिया, जिसके लिए उसे सम्मानित भी किया गया। पुरातत्व विभाग के सूत्रों ने बताया कि प्राचीन काल में लक्कुंडी में सोने के सिक्के ढाले जाते थे, जो इसकी ऐतिहासिक समृद्धि का प्रमाण है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
लक्कुंडी का गौरवशाली इतिहास और छिपी हुई संपदा
ऐतिहासिक रूप से लक्कुंडी में चालुक्य, राष्ट्रकूट, होयसला, कलचुरी और विजयनगर जैसे शक्तिशाली शासकों की समृद्ध विरासतें मौजूद हैं। इसके अलावा, यह प्राचीन स्थल प्रसिद्ध परोपकारी दानाचिंतामणि अत्तिमब्बे से भी जुड़ा हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि इस क्षेत्र में सोने, चांदी, हीरे, मोती, मूंगा और अन्य कीमती पत्थरों सहित अतुलनीय मात्रा में दबे हुए खजाने मौजूद हो सकते हैं। इस कार्य में लगे सूत्रों ने बताया कि लक्कुंडी सदियों से एक अत्यंत समृद्ध केंद्र रहा है, और उपलब्ध साक्ष्य इस बात की ओर इशारा करते हैं कि अपार भौतिक संपदा अभी भी इस धरती के गर्भ में छिपी हुई हो सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह खोज लक्कुंडी के छिपे हुए अतीत को उजागर करने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।


