
Darbhanga Goat Farming: जाले दरभंगा देशज टाइम्स। तकदीर की लकीरों को मेहनत के पसीने से बदलने का ख्वाब देख रहे ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार का एक नया दरवाजा खुला है, जहां कम लागत में मोटा मुनाफा कमाया जा सकता है। जाले स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह में यह बात स्पष्ट रूप से सामने आई।
जाले कृषि विज्ञान केंद्र में उन्नत बकरी पालन एवं उन्नत मुर्गी पालन विषय पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हो गया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। केंद्र के अध्यक्ष डॉ. दिव्यांशु शेखर ने इस अवसर पर कहा कि बकरी एवं मुर्गी पालन ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार का एक बेहतरीन और सशक्त माध्यम है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह व्यवसाय कम पूंजी और कम जगह में भी शुरू किया जा सकता है, जो इसे छोटे किसानों और भूमिहीन मजदूरों के लिए विशेष रूप से लाभकारी बनाता है।
Goat Farming: कम पूंजी में मुनाफे का सौदा
कार्यक्रम की संयोजक डॉ. पूजा कुमारी ने प्रशिक्षण की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस पांच दिवसीय कार्यक्रम में विभिन्न पंचायतों से बड़ी संख्या में ग्रामीण युवाओं ने हिस्सा लिया। बकरी पालन के प्रशिक्षण में कुल 45 युवक-युवतियों ने भाग लिया, जबकि मुर्गी पालन के प्रशिक्षण के लिए 42 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया था। उन्होंने समझाया कि बकरी पालन से मांस, दूध और खाल के माध्यम से अच्छी आमदनी होती है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार भी इस व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी और अन्य प्रकार की वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिससे किसानों पर बोझ कम होता है।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें व्यावहारिक पहलुओं पर भी गहराई से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बकरी और मुर्गी में होने वाली आम बीमारियों, उनके लक्षण और रोकथाम के उपायों पर प्रकाश डाला। इसके अलावा, सही समय पर टीकाकरण के महत्व, संतुलित पोषण, और उन्नत नस्लों के चयन के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई ताकि किसान अधिकतम लाभ कमा सकें। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
विशेषज्ञों ने दिए सफलता के मंत्र
इस व्यवसाय को शुरू करने में आने वाली वित्तीय बाधाओं को दूर करने के लिए कार्यक्रम में बैंकिंग विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया गया था। इंडियन बैंक की जोनल मैनेजर डॉ. प्रेरणा कुमारी ने विशेष रूप से उपस्थित होकर किसानों को विभिन्न सरकारी ऋण योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने यह भी समझाया कि कैसे किसान आसानी से लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं और सरकारी सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं।
प्रमाण पत्र वितरण समारोह के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के अन्य वैज्ञानिक और कर्मी भी मौजूद रहे, जिनमें डॉ. सीमा प्रधान और डॉ. पूजा कुमारी प्रमुख थीं। इस पूरे कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को पारंपरिक खेती के अलावा आय के नए स्रोत विकसित करने के लिए प्रेरित करना था, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह प्रशिक्षण निश्चित रूप से क्षेत्र के युवाओं के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है।


