
Share Market: भारत के शेयर बाजार में विदेशी निवेश को लेकर एक बड़ा बदलाव होने वाला है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। मार्केट रेगुलेटर SEBI ने फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) के लिए एक नई ‘नेटिंग सिस्टम’ का प्रस्ताव रखा है, जिसका सीधा असर उनकी परिचालन दक्षता और लागत पर पड़ेगा।
SEBI का बड़ा कदम: Share Market में FPIs के लिए नई ‘नेटिंग सिस्टम’
Share Market में लागत कम करने और दक्षता बढ़ाने का लक्ष्य
अभी तक, विदेशी निवेशकों को एक ही कारोबारी दिन में की गई हर खरीद और बिक्री का अलग-अलग सेटलमेंट करना होता था, जिससे उनकी फंडिंग लागत और परिचालन दबाव काफी बढ़ जाता था। सेबी के इस नए प्रस्ताव के तहत, अब खरीदे और बेचे गए ट्रेड्स को आपस में समायोजित किया जाएगा और केवल अंतिम शुद्ध स्थिति (final net position) का ही निपटान होगा। इस कदम से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार और अधिक आकर्षक बनेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सेबी का मानना है कि इस बदलाव से परिचालन दक्षता बढ़ेगी, फंडिंग लागत घटेगी और भारत में निवेश करना अधिक सुगम होगा। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, अमेरिकी शुल्क (US tariffs), कमजोर कॉर्पोरेट आय और महंगे मूल्यांकन के कारण भारत से विदेशी निवेश की निकासी देखी जा रही है। फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) के लिए यह सुधार निश्चित रूप से सकारात्मक संकेत है।
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इसके साथ ही, सेबी एफपीआई पंजीकरण प्रक्रिया को तेज करने, बाजार की गहराई बढ़ाने और वैश्विक निवेशकों का भरोसा बहाल करने के लिए लगातार सुधारों पर काम कर रहा है।
वैश्विक निवेशकों के लिए भारत की अपील
इस नए सिस्टम से न केवल एफपीआई के लिए कारोबार करना आसान होगा, बल्कि यह भारतीय पूंजी बाजार में दीर्घकालिक निवेश को भी बढ़ावा दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नीतिगत बदलाव भारत को एक पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में मजबूती प्रदान करेंगे, खासकर ऐसे समय में जब कई उभरते बाजारों को विदेशी पूंजी आकर्षित करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह कदम विदेशी निवेश को एक बार फिर भारत की ओर मोड़ने में कितना सफल होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।







