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मार्च, 4, 2026
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BMC Elections: मुंबई में ‘कमल’ का कमाल, दशकों बाद खत्म हुआ ठाकरे परिवार का दबदबा

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BMC Elections: मुंबई की सियासी पिच पर एक नया सूरज उगा है, जिसने दशकों पुराने ठाकरे परिवार के सियासी वर्चस्व को चुनौती दी है। यह सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि देश की आर्थिक राजधानी में बदलती राजनीतिक हवाओं और नए समीकरणों का स्पष्ट संकेत है।

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BMC Elections: मुंबई में ‘कमल’ का कमाल, दशकों बाद खत्म हुआ ठाकरे परिवार का दबदबा

BMC Elections: फडणवीस का बढ़ता कद और शिंदे की अग्निपरीक्षा

मुंबई नगर निगम (BMC) चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिवसेना (शिंदे गुट) गठबंधन ने प्रचंड जीत हासिल की है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही एशिया के सबसे धनी नगर निकाय पर ठाकरे परिवार का लंबे समय से चला आ रहा प्रभुत्व आखिरकार समाप्त हो गया है। इसके परिणामस्वरूप, मुंबई को एक लंबे अंतराल के बाद भाजपा-शिवसेना (शिंदे गुट) का महापौर मिलने वाला है। मुंबई नगर निकाय में भाजपा के इस अप्रत्याशित प्रदर्शन के बाद, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का नाम हर जुबान पर है। उनके नेतृत्व में, भाजपा ने 2017 में हासिल की गई अपनी पिछली सर्वोच्च 82 सीटों की संख्या को पार कर लिया है और अब तक बीएमसी के 227 वार्डों में से 88 में जीत हासिल की है या आगे चल रही है। मुंबई में उसकी सहयोगी शिवसेना (शिंदे गुट) 28 सीटों पर आगे है, जिससे यह गठबंधन 114 सीटों के बहुमत के आंकड़े को आराम से पार कर गया है।

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नगर निकाय में भाजपा का लगभग एकदलीय दबदबा इस बात को भी रेखांकित करता है कि मुख्यमंत्री के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, पार्टी की कमान संभालने के बाद से शिवसेना के गढ़ में अपने पारंपरिक आधार को बनाए रखने के लिए कितना संघर्ष कर रहे हैं। 2017 में अविभाजित शिवसेना के 84 पार्षदों में से अधिकांश शिंदे के साथ होने के बावजूद, उनका गुट मुश्किल से 30 सीटों का आंकड़ा पार कर पाया है। यह मुंबई की राजनीति में एक बड़ा बदलाव है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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यह भी पढ़ें:  Bihar Rajya Sabha Election: राज्यसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा बने NDA के उम्मीदवार, बिहार में राजनीतिक हलचल तेज़

कई मायनों में अलग रहे ये चुनाव

बीएमसी सहित राज्य की 29 महानगर पालिकाओं का यह चुनाव कई मायनों में पिछले दो दशकों में हुए चुनावों से बिल्कुल अलग और अप्रत्याशित रहा। जहां एक ओर बीएमसी चुनाव में ढाई दशक की सत्ता पर दोबारा काबिज होने के लिए 20 साल बाद शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे साथ आए, वहीं दूसरी ओर सत्ता के समीकरणों ने धुर विरोधी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) और भाजपा के बीच भी गठबंधन का अखाड़ा तैयार किया। इतना ही नहीं, विचारधारा को त्याग कर कांग्रेस और भाजपा के हाथ मिलाने की खबरों ने भी खूब सुर्खियां बटोरीं। दूसरी ओर, सत्ताधारी भाजपा, शिंदे सेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अजित पवार गुट ने कई स्थानों पर एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा और जमकर आरोप-प्रत्यारोप भी लगाए। जबकि 2023 में पार्टी पर कब्जा करने वाले उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने चाचा शरद पवार की एनसीपी के साथ गठबंधन कर पुणे महानगरपालिका का चुनाव लड़ा। इस चुनाव प्रचार में भी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों ने काफी अलग-अलग तरीके अपनाए, जिसमें डिजिटल प्रचार पर विशेष जोर दिया गया।

अकोट और अंबरनाथ के अप्रत्याशित समीकरण

महाराष्ट्र के अकोट में एमआईएम और भाजपा का गठबंधन सबसे अप्रत्याशित घटनाओं में से एक रहा। हालांकि, यह गठबंधन कुछ ही घंटों में टूट गया, लेकिन इससे भाजपा की काफी किरकिरी हुई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को स्थानीय नेताओं को स्पष्ट निर्देश देना पड़ा कि यह गठबंधन स्वीकार्य नहीं है और अनुशासनहीनता करने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। भाजपा ने इस मामले में स्थानीय विधायक प्रकाश भारखासले को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है।

अंबरनाथ में भी सत्ता के लिए कांग्रेस और भाजपा के बेमेल गठबंधन की पूरे चुनाव में चर्चा रही। इसके लिए भाजपा को आलोचना का सामना भी करना पड़ा, लेकिन मुंबई की राजनीति में ऐसे गठबंधन आम बात हो गए हैं, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अंबरनाथ नगर परिषद में भाजपा और कांग्रेस के हाथ मिला लेने से सियासी गलियारों में हलचल मच गई थी। हालांकि, यह गठबंधन भी कुछ ही घंटों में टूट गया और निकाले गए 12 पार्षद भाजपा में शामिल हो गए। वहीं, उपनगराध्यक्ष पद के चुनाव में शिंदे सेना ने अजित पवार की एनसीपी से मिलकर भाजपा उम्मीदवार को मात दे दी।

सत्ता में साथ, मगर चुनाव में खिलाफ की बिसात

सत्ताधारी भाजपा, शिंदे सेना और अजित पवार की एनसीपी ने राज्य की 29 महानगर पालिकाओं में से कई में एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा। मुंबई, ठाणे, कल्याण-डोबिवली, वसई-विरार, भिवंडी और पनवेल में जहां भाजपा और शिंदे सेना ने मिलकर चुनाव लड़ा, वहीं नवी मुंबई, मीरा-भाईंदर और उल्हासनगर में दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़े। जबकि अजित पवार की एनसीपी ने महायुति से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ा। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में अजित पवार और शरद पवार ने अपनी-अपनी एनसीपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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