
Ratha Saptami 2026: एक अत्यंत पवित्र और ऊर्जावान पर्व, जो भगवान सूर्यदेव को समर्पित है, इस वर्ष 24 जनवरी 2026, शनिवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, यह दिन सूर्य देव की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है, क्योंकि इस दिन भगवान सूर्य सात घोड़ों वाले अपने रथ पर सवार होकर प्रकट हुए थे। यह पर्व जीवन में सकारात्मकता, आरोग्य और समृद्धि लाता है।
रथ सप्तमी 2026: सूर्यदेव की कृपा पाने का महापर्व
भारतीय संस्कृति में सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना गया है, जिनकी ऊर्जा से ही समस्त सृष्टि का संचालन होता है। माघ मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को पड़ने वाला यह विशेष पर्व ‘रथ सप्तमी’ या ‘माघ सप्तमी’ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर, सूर्योदय के समय सूर्यदेव को अर्घ्य देने और उनकी उपासना करने से व्यक्ति को सभी रोगों से मुक्ति मिलती है और जीवन में यश, वैभव तथा संतान सुख प्राप्त होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
रथ सप्तमी 2026: शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
रथ सप्तमी का दिन सूर्यदेव के आशीर्वाद से जीवन को आलोकित करने का सुअवसर प्रदान करता है। इस दिन भक्तगण विशेष विधि-विधान से सूर्य भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं।
रथ सप्तमी 2026 शुभ मुहूर्त
| रथ सप्तमी तिथि | 24 जनवरी 2026, शनिवार |
| सप्तमी तिथि प्रारंभ | 23 जनवरी 2026, सुबह 10:47 बजे |
| सप्तमी तिथि समाप्त | 24 जनवरी 2026, सुबह 11:47 बजे |
| अरुणोदय काल में स्नान का शुभ मुहूर्त | 24 जनवरी 2026, सुबह 05:30 बजे से सुबह 06:50 बजे तक |
| सूर्य पूजा का शुभ मुहूर्त | 24 जनवरी 2026, सूर्योदय के बाद (लगभग सुबह 07:13 बजे से) |
सूर्यदेव की पूजा विधि
- रथ सप्तमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी या कुंड में स्नान करें। यदि यह संभव न हो, तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।
- स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सूर्यदेव को प्रणाम करें।
- सूर्य को अर्घ्य देने के लिए तांबे के लोटे में जल लें और उसमें लाल फूल, अक्षत, रोली तथा थोड़ा गुड़ मिलाकर उगते हुए सूर्य को ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करते हुए अर्घ्य दें।
- सूर्यदेव को धूप, दीप, नैवेद्य और लाल वस्त्र अर्पित करें।
- रथ सप्तमी के दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
- कई भक्त इस दिन व्रत भी रखते हैं और केवल एक बार फलाहार करते हैं।
- ब्राह्मणों और गरीबों को दान-दक्षिणा देना भी शुभ होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
रथ सप्तमी का पौराणिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रथ सप्तमी के दिन ही भगवान सूर्य ने संसार को प्रकाशित करना आरंभ किया था। इसी दिन से सूर्य अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड में विचरण करते हैं। इस दिन को सूर्य जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। यह पर्व जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और ज्ञान का संचार करता है। इस दिन किए गए दान और तप का विशेष फल प्राप्त होता है।
सूर्य मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः।
ॐ मित्राय नमः। ॐ रवये नमः।
ॐ सूर्याय नमः। ॐ भानवे नमः।
ॐ खगाय नमः। ॐ पूष्णे नमः।
ॐ हिरण्यगर्भाय नमः। ॐ मरीचये नमः।
ॐ आदित्याय नमः। ॐ सवित्रे नमः।
ॐ अर्काय नमः। ॐ भास्कराय नमः॥
रथ सप्तमी का यह पावन पर्व हमें सूर्यदेव की महिमा और उनके अतुल्य योगदान की याद दिलाता है। इस दिन सच्ची श्रद्धा और भक्ति से की गई उपासना निश्चित रूप से आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अपने जीवन को प्रकाशमान बनाने के लिए इस दिन विशेष रूप से सूर्यदेव की आराधना अवश्य करें।
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