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मार्च, 5, 2026
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Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या का महत्व और पूजा विधि

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Mauni Amavasya 2026: माघ मास की मौनी अमावस्या का पावन पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह दिन पवित्र स्नान, दान और पितरों को तर्पण अर्पित करने के लिए अत्यंत शुभ माना गया है, जिससे आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति प्राप्त होती है। आइए जानें वर्ष Mauni Amavasya 2026 कब है और इस दिन कौन से महत्वपूर्ण कार्य करने चाहिए, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या का महत्व और पूजा विधि

Mauni Amavasya 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

मौनी अमावस्या 2026: माघ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस दिन मौन रहकर पवित्र नदियों में स्नान करने और दान-पुण्य करने का विधान है। मान्यता है कि इससे पितृ दोष दूर होते हैं और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

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मौनी अमावस्या 2026 की सही तिथि

वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या का पावन पर्व रविवार, 18 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष फल बताया गया है। इस दिन किए गए स्नान दान से समस्त पापों का शमन होता है।

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शुभ मुहूर्त

मौनी अमावस्या के दिन शुभ कार्यों और पितृ तर्पण के लिए निम्नलिखित मुहूर्त महत्वपूर्ण हैं:

विवरणसमय (IST)
अमावस्या तिथि प्रारंभ18 जनवरी 2026, प्रातः 08:35 बजे से
अमावस्या तिथि समाप्त19 जनवरी 2026, प्रातः 06:10 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्तप्रातः 05:25 बजे से 06:19 बजे तक

मौनी अमावस्या की पूजा विधि

इस पुण्यदायिनी तिथि पर निम्नलिखित विधि से पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्य करने चाहिए:

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि यह संभव न हो, तो घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • स्नान के उपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • अपने पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और दान करें। तिल, गुड़, कंबल, वस्त्र, घी, अन्न आदि का दान करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
  • इस दिन यथासंभव मौन व्रत का पालन करें। मौन रहने से मन शांत होता है और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है।
  • ब्राह्मणों और गरीबों को श्रद्धापूर्वक भोजन कराएं।
  • पीपल के वृक्ष की पूजा करें और उसके नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं।
  • भगवान विष्णु का ध्यान करें और उनके मंत्रों का जाप करें।
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मौनी अमावस्या का पौराणिक महत्व

सनातन धर्म में मौनी अमावस्या का विशेष स्थान है। पुराणों के अनुसार, इस दिन मनु ऋषि का जन्म हुआ था, जिसके कारण इसे ‘माघ अमावस्या’ और ‘मौनी अमावस्या’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में देवताओं का वास होता है और वहां स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन मौन व्रत का संकल्प लेने से आत्म-नियंत्रण बढ़ता है और मानसिक शुद्धता आती है।

पितृ तर्पण हेतु मंत्र

ॐ पितृभ्यो नमः।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

निष्कर्ष और उपाय

मौनी अमावस्या का दिन आध्यात्मिक शुद्धि, पितृ शांति और पुण्य लाभ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन सच्चे मन से किए गए कार्य निश्चित रूप से शुभ फल प्रदान करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यदि कोई व्यक्ति किसी कारणवश नदी में स्नान न कर पाए, तो घर पर ही स्नान करते समय ‘गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु।’ मंत्र का जाप कर सकता है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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