

बिहार नई रेलवे लाइन: बिहार के विकास यात्रा में अब एक और मील का पत्थर जुड़ने जा रहा है। प्रदेश में दो महत्वपूर्ण नई रेल परियोजनाओं का खाका खींचा जा रहा है, जो न केवल आवागमन को सुगम बनाएंगी बल्कि व्यापार और पर्यटन को भी नई उड़ान देंगी। रेलवे ने इन परियोजनाओं के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने से पहले अंतिम एलाइनमेंट सर्वे के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है।
बिहार नई रेलवे लाइन: दो दशकों का इंतजार हुआ खत्म, सीमांचल और मिथिलांचल को मिलेगी सौगात
इन दोनों परियोजनाओं में सीतामढ़ी से जयनगर, निर्मली वाया सुरसंड तक 188 किलोमीटर लंबी रेल लाइन और ललित ग्राम से वीरपुर तक 22 किलोमीटर लंबी रेल लाइन शामिल हैं। इन महत्वपूर्ण रेल लाइनों के निर्माण से पहले, भारतीय रेलवे ने एलाइनमेंट के फाइनल सर्वे के लिए अपनी तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए आवश्यक निविदा प्रक्रिया पहले ही आरंभ की जा चुकी है, और उम्मीद है कि फरवरी महीने में एजेंसी का चयन होने के बाद सर्वे कार्य विधिवत शुरू हो जाएगा।
पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य अभियंता (निर्माण) महबूब आलम ने बिहार सरकार के ऊर्जा, योजना एवं विकास मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव को इस संबंध में एक पत्र भेजा है। पत्र में बताया गया है कि ललित ग्राम से वीरपुर रेल लाइन के लिए रेलवे बोर्ड ने 9 सितंबर 2025 को एलाइनमेंट के अंतिम सर्वे को हरी झंडी दे दी थी। वहीं, सीतामढ़ी से जयनगर, निर्मली वाया सुरसंड रेल परियोजना को मूल रूप से 2008-09 में मंजूरी मिली थी, लेकिन 2019 में रेलवे बोर्ड ने इसे रोक दिया था। अब 29 सितंबर 2025 को रेलवे बोर्ड ने इस परियोजना को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र ने भी इस बात की पुष्टि की है कि दोनों परियोजनाओं का डीपीआर तैयार करने से पहले अंतिम एलाइनमेंट सर्वे के लिए निविदा जारी कर दी गई है। उन्होंने दोहराया कि फरवरी में निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सर्वे का काम शुरू होगा। ये परियोजनाएं बिहार की रेलवे कनेक्टिविटी को एक नया आयाम देंगी।
नेपाल सीमा तक आवागमन होगा सुगम, बढ़ेगा व्यापार
सुपौल जिले के ललित ग्राम से वीरपुर तक प्रस्तावित 22 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह सीधे नेपाल सीमा तक आवागमन को बेहद सुगम बनाएगी। इस पहल से न केवल व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि पर्यटन क्षेत्र और सीमावर्ती क्षेत्रों का समग्र विकास भी तेज गति पकड़ेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह नई रेल लाइन जिले को बेहतर रेलवे कनेक्टिविटी से तो जोड़ेगी ही, साथ ही भारत-नेपाल सीमा के निकट आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूत करेगी।
सीतामढ़ी से सुरसंड तक नई रेल लाइन का निर्माण सुपौल, मधुबनी और सीतामढ़ी सहित पूरे मिथिलांचल और सीमांचल क्षेत्र के लोगों के लिए वरदान साबित होगा। इन क्षेत्रों में वर्तमान में रेल नेटवर्क सीमित है, जिससे व्यापार और लोगों के आवागमन में काफी असुविधा होती है। यह नई रेल परियोजना न केवल यात्रा को आसान बनाएगी, बल्कि कृषि उत्पादों, छोटे उद्योगों और स्थानीय व्यापार के लिए एक बड़ा और सुलभ बाजार भी उपलब्ध कराएगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
मिथिलांचल और सीमांचल को मिलेगा विकास का नया रास्ता
इन दोनों रेल लाइनों के शुरू होने से बिहार के इन महत्वपूर्ण अंचलों में सामाजिक और आर्थिक बदलाव की बयार बहेगी। बेहतर परिवहन सुविधाओं से जहां लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, वहीं स्थानीय उत्पादकों को भी अपने माल को दूर-दराज के बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। यह क्षेत्र लंबे समय से अपेक्षित विकास की राह पर आगे बढ़ेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
रेलवे की इस पहल से क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने में भी मदद मिलेगी और यह सुनिश्चित होगा कि बिहार के सुदूर इलाके भी आधुनिक परिवहन व्यवस्था से जुड़ सकें। यह सिर्फ दो नई रेल लाइनें नहीं हैं, बल्कि यह आशा और प्रगति की नई लकीरें हैं, जो बिहार के भविष्य को और उज्ज्वल करेंगी।


