Study in USA: अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी का सपना देख रहे भारतीय युवाओं के लिए बीते साल काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के पहले ही साल में नीतियों में तेजी से बदलाव आए, जिसका सबसे ज्यादा असर भारतीय छात्रों पर पड़ा। आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका की यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में लगभग 75 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई।
Study in USA: भारतीय छात्रों के लिए अमेरिकी सपनों की राह हुई मुश्किल, जानें क्या हैं नए नियम?
Study in USA: अमेरिकी वीजा नियमों में सख्ती का असर
विदेशी शिक्षा से जुड़ी एजेंसियों के विश्लेषण के मुताबिक, अगस्त से अक्टूबर के बीच होने वाला फॉल सेशन सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। यह सत्र आमतौर पर कुल दाखिलों का करीब 70 फीसदी होता है, लेकिन बीते साल इस दौरान बहुत कम छात्र अमेरिका जा सके। इसकी प्रमुख वजह वीजा इंटरव्यू स्लॉट की कमी और जांच में अत्यधिक सख्ती रही। कई भारतीय छात्रों को समय पर स्लॉट ही नहीं मिल पाए, जिससे उनकी अमेरिका जाने की योजना धरी की धरी रह गई। शिक्षा सलाहकारों का कहना है कि जिन छात्रों ने फरवरी या मार्च तक आवेदन प्रक्रिया पूरी कर ली थी, केवल वही किसी तरह आगे बढ़ पाए। हैदराबाद स्थित एक एजेंसी के संचालक अरविंद मांडुवा ने बताया कि यह पहली बार है जब भारतीय छात्रों की दाखिला संख्या में इतनी बड़ी गिरावट देखी गई है। वीजा जांच पहले से कहीं ज्यादा सख्त हो गई, जिससे रिजेक्शन बढ़े और छात्रों का भरोसा डगमगा गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
कई छात्रों ने उम्मीद की थी कि वे स्प्रिंग सेशन यानी जनवरी से मार्च में दाखिला लेंगे और तब तक हालात सुधर जाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वीजा स्लॉट तब भी सीमित रहे और जांच और भी बढ़ गई। चौंकाने वाली बात यह है कि अब छात्रों की सोशल मीडिया एक्टिविटी पर भी पैनी नजर रखी जाने लगी, जिससे छात्रों में तनाव और डर का माहौल बन गया। ये नए वीजा नियम भारतीय छात्रों के लिए अतिरिक्त परेशानी का सबब बन गए हैं।
जो छात्र पहले से ही अमेरिका में अपनी पढ़ाई कर रहे थे, उनके लिए हालात और भी कठिन रहे। अमेरिकी विदेश विभाग के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 तक करीब 8,000 छात्र वीजा रद्द कर दिए गए। कई छात्रों को अचानक ईमेल प्राप्त हुए कि उनका एफ-1 वीजा रद्द हो गया है और उन्हें कुछ ही हफ्तों में देश छोड़ने का आदेश दिया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कई मामलों में वीजा रद्द करने की वजह पुराने और मामूली मामले बने। बोस्टन में पढ़ने वाले एक 25 वर्षीय छात्र ने बताया कि साल 2024 में उसकी स्पीडिंग की चालान कटा था, जिस पर कोई केस नहीं चला। इसके बावजूद, उसका वीजा रिकॉर्ड रद्द कर दिया गया। बाद में वकील की मदद से कागजात जमा करने पर स्थिति ठीक हुई, लेकिन इस प्रक्रिया ने उसे अत्यधिक तनाव में डाल दिया।
अमेरिका में नौकरी और बदलते हालात
छात्रों के साथ-साथ H-1B वीजा पर काम कर रहे प्रोफेशनल्स भी भारी दबाव में रहे। सरकार की ओर से इस वीजा पर भारी फीस लगाने और इसकी संख्या कम करने की बातों ने चिंता बढ़ा दी। H-1B वीजा पाने वालों में लगभग 72 फीसदी भारतीय हैं, जिनमें ज्यादातर आईटी सेक्टर से जुड़े पेशेवर शामिल हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अमेरिका में नौकरी के हालात भी कमजोर रहे। कई कंपनियों ने नई भर्तियां रोक दीं, वीजा ट्रांसफर टाल दिए और कुछ मामलों में तो नौकरी के ऑफर तक रद्द कर दिए। टेक्सास से एमबीए करने वाले 27 साल के सैफ ने बताया कि इंटरव्यू पास करने के बाद भी उनका ऑफर बाद में रद्द कर दिया गया, जिससे उन्हें काफी निराशा हुई। ये बदलते वीजा नियम और नौकरी के हालात भारतीय पेशेवरों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं।
तनाव की एक और वजह बनी नई गाइडलाइन। इसके तहत H-1B वीजा धारकों और उनके परिवार के लोगों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पब्लिक रखने की चेतावनी दी गई। स्पष्ट कहा गया कि अमेरिका विरोधी पोस्ट करने से वीजा रद्द या देश से बाहर किया जा सकता है। इससे लोग हर पोस्ट को लेकर डर में रहने लगे।
होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने काम की अनुमति से जुड़ा एक नियम भी बदल दिया है। पहले वीजा रिन्यू होने तक ऑटोमैटिक एक्सटेंशन मिल जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। इसका मतलब यह हुआ कि यदि अनुमति खत्म हो गई और नई मंजूरी नहीं मिली, तो काम तुरंत रोकना पड़ेगा। यह नियम उन सभी भारतीय पेशेवरों को प्रभावित करेगा जो अमेरिका में काम कर रहे हैं। लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें







