



Cycle Rally: जब पैडल पर पड़े पांव सिर्फ किलोमीटर नहीं नापते, बल्कि संस्कृति, स्वास्थ्य और पर्यावरण के नए अध्याय लिखते हैं। कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला जब राष्ट्रकवि दिनकर की धरती से माता सीता की जन्मभूमि तक एक अनोखी यात्रा शुरू हुई। दरभंगा के कमतौल स्थित प्रसिद्ध तीर्थ स्थल अहल्यास्थान मंगलवार को इस अनूठी पहल का गवाह बना, जहां 25 साइकिल सवारों का एक जत्था पहुंचा। ‘साइकिल पे संडे’ कार्यक्रम के तहत आयोजित इस यात्रा ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा।
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मस्थली सिमरिया से नेपाल के जनकपुर धाम के लिए निकले इन साइकिल सवारों का स्वागत अहल्यास्थान धार्मिक न्यास समिति के अध्यक्ष बालेश्वर ठाकुर और सदस्य उमेश ठाकुर ने किया। उन्होंने सभी यात्रियों को ‘अहल्या संदेश’ पत्रिका भेंट कर सम्मानित किया। यह यात्रा सिर्फ एक सफर नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण संदेश लेकर चल रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Simaria to Janakpur Cycle Rally का उद्देश्य
यात्रा का नेतृत्व कर रहे डॉ. कुंदन कुमार ने बताया कि यह ‘अनहद यात्रा 6.0’ का हिस्सा है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य लोगों को छोटी दूरियां साइकिल से तय करने के लिए प्रेरित करना है। इससे न केवल हमारा शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि पर्यावरण को सुरक्षित रखने में भी मदद मिलती है। यह जत्था 16 जनवरी को सिमरिया से अपनी यात्रा पर निकला था और विभिन्न ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों से गुजरता हुआ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस पहल से पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी जागरूकता फैलाई जा रही है।
इस यात्रा के तहत साइकिल सवार दरभंगा-मधुबनी के मिथिला हाट, महाकवि विद्यापति की जन्मस्थली बिस्फी, तीर्थ स्थल अहल्यास्थान, गौतम कुंड और उच्चैठ जैसे महत्वपूर्ण स्थानों से होते हुए गुजर रहे हैं। करीब 400 किलोमीटर की यह चुनौतीपूर्ण यात्रा मंगलवार देर शाम तक नेपाल के जनकपुर में संपन्न हो जाएगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
आध्यात्म, संस्कृति और पर्यावरण का संगम
डॉ. कुंदन कुमार ने जोर देकर कहा कि यह यात्रा साइकिल, भारतीय संस्कृति और आध्यात्म का एक अनूठा संगम है। इसका लक्ष्य केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी नमन करना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसी भावना के साथ जत्थे ने अहल्यास्थान में मौजूद स्थानीय लोगों को अमरूद और अन्य सजावटी पौधों के पौधे भी वितरित किए, ताकि हरियाली का संदेश घर-घर तक पहुंच सके। यह पहल दिखाती है कि कैसे छोटे-छोटे कदम बड़े बदलाव की नींव रख सकते हैं।



