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फ़रवरी, 18, 2026
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Madhubani महकमा का एक्शन मोड, 7 दिनों में ICC नहीं बनाने पर लगेगा ₹50,000 का जुर्माना, जानिए क्या है POSH Act

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POSH Act: जैसे पानी के बिना मछली की कल्पना नहीं हो सकती, वैसे ही कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा के बिना आधुनिक समाज की कल्पना अधूरी है। इसी को और पुख्ता करने के लिए मधुबनी जिला प्रशासन ने अब कमर कस ली है और संस्थानों को सख्त चेतावनी जारी की है।

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मधुबनी DM का एक्शन मोड, 7 दिनों में ICC नहीं बनाने पर लगेगा ₹50,000 का जुर्माना, जानिए क्या है POSH Act

मधुबनी में कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न को रोकने और उन्हें एक सुरक्षित माहौल देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को मधुबनी के डीआरडीए सभागार में जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास निगम ने संयुक्त रूप से इस कार्यक्रम का आयोजन किया। इसका मुख्य उद्देश्य ‘महिला कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013’ को प्रभावी ढंग से लागू करवाना था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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POSH Act-2013 को लेकर जिलाधिकारी का सख्त रुख

कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस मौके पर मधुबनी के जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में कड़ा संदेश देते हुए जिले के सभी सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों, जिनमें निजी अस्पताल भी शामिल हैं, को अगले 7 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन करने का निर्देश दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि इस अवधि के बाद औचक निरीक्षण किया जाएगा और जिन संस्थानों में ICC नहीं पाई गई, उन पर अधिनियम के तहत ₹50,000 का जुर्माना लगाया जाएगा। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा, “महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा एवं सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।” इस पहल का मुख्य लक्ष्य कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देना है।

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पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार ने भी इस अधिनियम को अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावी बताते हुए सभी संस्थानों में ICC के गठन की अनिवार्यता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह महिलाओं को एक सुरक्षित और भयमुक्त माहौल देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

कानूनी प्रावधानों और शिकायत प्रक्रिया पर हुई विस्तृत चर्चा

कार्यशाला के दौरान, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (ICDS) ललिता कुमारी ने अधिनियम की पृष्ठभूमि, इसके उद्देश्यों और प्रमुख प्रावधानों पर विस्तृत जानकारी दी। वहीं, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने इसके कानूनी पहलुओं, ICC और LCC (स्थानीय शिकायत समिति) की संरचना और शिकायत निवारण की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हर शिकायत का निष्पक्ष, गोपनीय और समयबद्ध तरीके से 90 दिनों के भीतर निपटारा करना अनिवार्य है।

इस कार्यक्रम में SHe-Box पोर्टल के बारे में भी जानकारी दी गई, जो महिलाओं को ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने का एक सुरक्षित माध्यम प्रदान करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जिला मिशन समन्वयक ने बताया कि यह पोर्टल निजी संस्थानों के पंजीकरण और शिकायतों के पारदर्शी निवारण में मदद करता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस कार्यशाला का उद्देश्य सभी विभागों और संस्थानों को महिलाओं के प्रति संवेदनशील बनाना और उनके लिए एक सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करना रहा।

इस महत्वपूर्ण बैठक में उप-विकास आयुक्त सुमन प्रसाद साह, सिविल सर्जन हरेन्द्र कुमार, डीपीआरओ परिमल कुमार, सहायक निदेशक नितेश पाठक, जिला परिवहन पदाधिकारी रामबाबू सहित कई अन्य पदाधिकारी और बाल विकास परियोजना पदाधिकारी मौजूद थे, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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