
CM Law College दरभंगा की पहचान पर संकट, 320 की जगह सिर्फ 60 सीटों पर एडमिशन, वकीलों ने खोला मोर्चा
CM Law College: ज्ञान की जिस भूमि पर कानून के दीये जलते थे, वहां अब अंधेरा छाने का खतरा मंडरा रहा है। मिथिला की पावन धरती पर स्थित ऐतिहासिक सीएम लॉ कॉलेज की अस्मिता आज दांव पर है, और इसे बचाने के लिए दरभंगा के अधिवक्ताओं ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष से गुहार लगाई है।
क्यों खतरे में है CM Law College की विरासत?
दरभंगा जिला बार एसोसिएशन के दर्जनों अधिवक्ताओं ने एक स्मार पत्र भेजकर इस ऐतिहासिक संस्थान को बचाने की मांग की है। पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कॉलेज में एक गैर-विधि डिग्रीधारी व्यक्ति को प्रभारी प्राचार्य बना दिया गया है, जिसे तत्काल हटाकर विधि डिग्रीधारी प्राचार्य की नियुक्ति की जानी चाहिए। इस संबंध में कुलाधिपति और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति को भी सूचित करने का आग्रह किया गया है।
पत्र में कॉलेज के गौरवशाली इतिहास का जिक्र करते हुए बताया गया कि यहां आजादी से पहले वर्ष 1944-45 से ही बैचलर ऑफ लॉ की पढ़ाई हो रही थी। वर्ष 1971 से लेकर सत्र 2010-11 तक, यहां एलएलबी कोर्स में 320 छात्रों का नामांकन होता था। लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही के कारण यह स्वर्णिम अध्याय अब धुंधलाने लगा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करने में कॉलेज विफल रहा, जिसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
अधिवक्ताओं ने बताया कि कॉलेज में न तो पूर्णकालिक प्राचार्य हैं और न ही 11 पूर्णकालिक शिक्षकों के पद भरे गए हैं। इसके अतिरिक्त, कक्षाओं के संचालन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का भी घोर अभाव है। इन्हीं कमियों के कारण, विश्वविद्यालय की इस अंगीभूत इकाई में सत्र 2021 से 2024-25 तक छात्रों के नामांकन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी। यह एक गंभीर स्थिति है जो मिथिला में कानून की शिक्षा के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगाती है।
बीसीआई के निरीक्षण के बाद, सत्र 2025-26 के लिए 320 सीटों की जगह मात्र 60 छात्रों के नामांकन की सशर्त अनुमति दी गई है, जो ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। अधिवक्ताओं का कहना है कि कॉलेज में पूर्णकालिक प्राचार्य, शिक्षकों की नियुक्ति और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था करना विश्वविद्यालय प्रशासन का नैतिक और प्रशासनिक दायित्व है, जिसमें वे पूरी तरह विफल रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
क्या हैं अधिवक्ताओं की प्रमुख मांगें?
स्मार पत्र के माध्यम से मांग की गई है कि कॉलेज की पुरानी गरिमा को तत्काल बहाल किया जाए ताकि मिथिला के छात्रों को कानून की पढ़ाई से वंचित न होना पड़े। उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया से आग्रह किया है कि वे अपने स्तर से बिहार के कुलाधिपति को इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए सूचित करें। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- बीसीआई के मानकों के अनुरूप पूर्णकालिक प्राचार्य और शिक्षकों की तत्काल नियुक्ति हो।
- शिक्षण कार्य के लिए आवश्यक भवन और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण कराया जाए।
- कॉलेज में पूर्व से स्वीकृत 320 छात्रों के नामांकन का मार्ग फिर से प्रशस्त किया जाए।
इस स्मार पत्र पर अधिवक्ता सुधीर कुमार चौधरी, विजय नारायण चौधरी, अनिल कुमार मिश्रा, बुलन कुमार झा, कुमार उत्तम, मुरारी लाल केवट, सनोज कुमार, और हीरानंद मिश्रा सहित दर्जनों अधिवक्ताओं ने हस्ताक्षर कर अपनी आवाज बुलंद की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले में प्रशासन कब तक कोई ठोस कदम उठाता है।




