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फ़रवरी, 18, 2026
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Madhubani में POSH Act पर कार्यशाला का आयोजन, अब कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा होगी सुनिश्चित, जानिए क्या हैं नियम, सम्मान और सुरक्षा की लकीर

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POSH Act: दफ्तर की चहारदीवारी के भीतर जब सम्मान और सुरक्षा की लकीर धुंधलाने लगे, तो कानून का हथौड़ा ही उसे दोबारा खींचता है। मधुबनी में इसी कानूनी हथौड़े की धार तेज करने के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

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क्या है POSH Act और क्यों है इसकी जरूरत?

मधुबनी समाहरणालय में 21 जनवरी 2026 को महिला एवं बाल विकास निगम की ओर से कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 यानी POSH Act पर आधारित कार्यशाला के दूसरे दिन का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में विशेष रूप से शिक्षा विभाग से जुड़े प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) और विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने हिस्सा लिया, ताकि शिक्षा के मंदिरों में भी कामकाजी महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल सुनिश्चित किया जा सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य कार्यस्थल को महिलाओं के लिए पूरी तरह सुरक्षित बनाना है।

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कार्यक्रम की शुरुआत में, जिला परियोजना प्रबंधक (DPM–WCDC) ने कार्यशाला के उद्देश्यों, इसके महत्व और इससे अपेक्षित परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे यह कानून महिलाओं को कार्यस्थल पर एक भयमुक्त वातावरण प्रदान करने में सहायक है।

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कार्यशाला में किन अहम बिंदुओं पर हुई चर्चा?

कार्यशाला को आगे बढ़ाते हुए, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO–ICDS) ने अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की गहन जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार के यौन उत्पीड़न की शिकायत पर निवारण की प्रक्रिया क्या है और इसमें आंतरिक समिति (Internal Committee) एवं स्थानीय समिति (Local Committee) की क्या भूमिका होती है। उन्होंने एक सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर भी जोर दिया। प्रतिभागियों की व्यावहारिक समझ को विकसित करने के लिए उन्हें अधिनियम से संबंधित एक जागरूकता वीडियो भी दिखाया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

C3 संस्थान के रीजनल कोऑर्डिनेटर ने आंतरिक समिति (IC) और स्थानीय समिति (LC) के गठन की प्रक्रिया और उनकी जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने समझाया कि हर संस्थान में इन समितियों का होना क्यों अनिवार्य है।

कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर भी दिया गया जोर

कार्यक्रम के दौरान अधिवक्ता रेणु जी ने अधिनियम से जुड़े कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डाला और प्रतिभागियों के कानूनी सवालों के जवाब दिए। उन्होंने बताया कि कानून का उल्लंघन करने पर क्या सजा हो सकती है। इसके अतिरिक्त, जिला मिशन समन्वयक द्वारा C-Box पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने की ऑनलाइन प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई, ताकि महिलाएं आसानी से अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। इस कार्यशाला में महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़े सभी कर्मियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

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