
Darbhanga Land Fraud: न्याय की चौखट पर, जब सरकारी कारिंदों पर ही भ्रष्टाचार की कालिख पुत जाए, तो आम जनता का भरोसा डगमगाना स्वाभाविक है। दरभंगा की धरती पर कुछ ऐसा ही हुआ है, जहाँ तत्कालीन अंचलाधिकारी समेत पांच लोगों के खिलाफ अदालत ने एक गंभीर आपराधिक मामले में संज्ञान लिया है, जिसने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरभंगा भूमि घोटाला: कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी जुनैद आलम की कोर्ट ने बहेड़ी अंचल के तत्कालीन अंचल अधिकारी मुकेश कुमार और निमैठी के हल्का कर्मचारी नीतीश कुमार सहित कुल पांच अभियुक्तों के विरुद्ध संज्ञान आदेश पारित किया है। यह मामला जोरजा गांव के टोला पहाड़पुर निवासी शाहनवाज आलम ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में दर्ज कराया था, जिसमें उन्होंने सरकारी पद के दुरुपयोग और धनार्जन के लिए किए गए फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है।
पीड़ित शाहनवाज आलम के मुताबिक, कर्मचारी और अंचलाधिकारी ने मिलकर गलत नीयत से गैरकानूनी तौर पर पैसा कमाने के लिए जालसाजी व षड्यंत्र रचा। इस सरकारी अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त होकर उन्होंने मो. शहाबुद्दीन, मो. मोहिउद्दीन सिद्दकी और मो. सलाउद्दीन को लाभ पहुंचाने की मंशा से शाहनवाज की भूमि के सरकारी अभिलेखों में हेरफेर की। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने गलत तरीके से जमाबंदी कायम कर दी और सरकारी इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख राजस्व रसीद में भी छेड़छाड़ कर एक गंभीर अपराध को अंजाम दिया।
शाहनवाज आलम ने बताया कि जब उन्होंने इस संबंध में बहेड़ी थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, तो पुलिस ने उनका आवेदन लेने से भी इनकार कर दिया। इसके बाद, पीड़ित ने न्याय की गुहार लगाते हुए मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और वहां मुकदमा दर्ज कराया।
अदालत ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए भारतीय दंड संहिता की पुरानी धारा 120 बी (जिसे अब 61 बीएनएस के तहत वर्गीकृत किया गया है), धारा 420 (जो अब 316 बीएनएस है), 467 (अब 336 बीएनएस), 471 (अब 340 बीएनएस), 218 (अब 229 बीएनएस) और 34 भादवि (अब 3(5) बीएनएस) जैसी गंभीर धाराओं के तहत संज्ञान लिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1, जो आपको हर ख़बर से अवगत कराता है। न्यायालय ने पीड़ित को अभियुक्तों के विरुद्ध नोटिस के उपकरण दाखिल करने का भी निर्देश दिया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
## न्याय की आस में पीड़ित परिवार
इस मामले ने एक बार फिर राजस्व विभाग में व्याप्त कथित अनियमितताओं और सरकारी अधिकारियों पर उठते सवालों को उजागर किया है। पीड़ित शाहनवाज आलम और उनका परिवार अब न्याय की आस में अदालत की तरफ देख रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला आगे चलकर क्या मोड़ लेता है और क्या दोषी पाए गए लोगों को उनके कृत्यों के लिए दंडित किया जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस प्रकरण से यह भी स्पष्ट होता है कि जब निचले स्तर पर सुनवाई नहीं होती, तो आम नागरिक को न्याय के लिए किस तरह उच्च न्यायालयों का रुख करना पड़ता है।






