
Basant Panchami 2026: माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ने वाला बसंत पंचमी का पावन पर्व प्रकृति और आध्यात्म के संगम का प्रतीक है। यह दिन विद्या, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती को समर्पित है, जिनकी आराधना से ज्ञान और बुद्धि का प्रकाश जीवन में प्रकाशित होता है। आज के दिन शहर के सभी शैक्षणिक संस्थानों, हॉस्टलों व अपार्टमेंट्स में इसकी भव्य तैयारियां की गयी हैं। माँ सरस्वती ज्ञान और विवेक की अधिष्ठात्री देवी हैं, और इसी ज्ञान की आभा हमारे शहर के कई युवाओं में दिखायी देती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह पर्व विशेष रूप से छात्रों, कलाकारों और बुद्धिजीवियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दिन की गई सरस्वती पूजा उन्हें असीमित ज्ञान और कला की प्राप्ति का वरदान देती है।
Basant Panchami 2026: सरस्वती पूजन विधि और शुभ मुहूर्त
बसंत पंचमी का पर्व सिर्फ ज्ञान की देवी की पूजा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के नव-जागरण का भी संकेत देता है। इस दिन से बसंत ऋतु का आगमन माना जाता है, जब पेड़-पौधों में नई पत्तियां और फूल खिलने लगते हैं। यह शुभ दिन ज्ञान के साथ-साथ प्रेम, उत्साह और सकारात्मकता का संचार करता है। इस दिन बच्चे अपनी पढ़ाई की शुरुआत करते हैं, संगीतज्ञ अपने वाद्य यंत्रों की पूजा करते हैं, और कलाकार अपनी कला को निखारने का संकल्प लेते हैं। इस दिन पीले वस्त्र धारण करने का भी विशेष महत्व है, क्योंकि पीला रंग मां सरस्वती को अत्यंत प्रिय है और यह सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
बसंत पंचमी का महत्व
माँ सरस्वती की पूजा बसंत पंचमी पर अत्यंत सरल और श्रद्धापूर्ण तरीके से की जाती है।
- सुबह स्नान कर स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल पर माँ सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- सबसे पहले गणेश जी का पूजन करें।
- माँ सरस्वती को पीले फूल, पीली मिठाई, फल, अक्षत, रोली, चंदन और केसर अर्पित करें।
- अपनी पुस्तकें, कॉपी, कलम और वाद्य यंत्रों को भी माँ के समक्ष रखें।
- ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें।
- सरस्वती वंदना और मंत्रों का जाप करें।
- अंत में आरती कर प्रसाद वितरण करें।
शुभ मुहूर्त (उदाहरण)
बसंत पंचमी 2026 पर सरस्वती पूजन का शुभ मुहूर्त स्थानीय पंचांग के अनुसार भिन्न हो सकता है, लेकिन सामान्यतः यह तिथि पूरे दिन शुभ मानी जाती है।
| विवरण | समय (उदाहरण) |
|---|---|
| पंचमी तिथि प्रारंभ | 24 जनवरी 2026, सुबह 08:30 बजे |
| पंचमी तिथि समाप्त | 25 जनवरी 2026, सुबह 07:15 बजे |
| पूजन का शुभ समय | 24 जनवरी 2026, सुबह 09:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक |
| दोपहर 02:00 बजे से शाम 05:00 बजे तक |
यह मुहूर्त केवल एक उदाहरण है। सटीक समय के लिए अपने स्थानीय पंचांग का अवलोकन करें।
मां सरस्वती के मंत्र
माँ सरस्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए इन मंत्रों का जाप करें:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः।
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
बसंत पंचमी पर क्या करें और क्या न करें
इस दिन कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- क्या करें: पीले रंग के वस्त्र पहनें, ज्ञान की वस्तुओं का दान करें, बड़ों का आशीर्वाद लें, शिक्षा से जुड़े कार्य प्रारंभ करें।
- क्या न करें: किसी से वाद-विवाद न करें, मांस-मदिरा का सेवन न करें, पेड़-पौधे न काटें, आलस्य त्यागें।
इस शुभ अवसर पर, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1, जो आपको धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक जानकारी प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
बसंत पंचमी का यह पवित्र दिन हमें ज्ञान और विद्या के महत्व को समझने का अवसर देता है। माँ सरस्वती की आराधना कर हम अपने जीवन में सकारात्मकता, सृजनात्मकता और प्रज्ञा का संचार कर सकते हैं। इस दिन विशेष रूप से छात्रों को मां सरस्वती को शहद और सफेद मिठाई का भोग लगाना चाहिए, और ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं’ मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए। यह उपाय उन्हें शिक्षा और करियर में सफलता दिलाएगा। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।






