
Netaji Files: इतिहास के पन्नों में आज भी कुछ अनकहे किस्से दफन हैं, जिनकी परतें खोलने का इंतजार सदियों से हो रहा है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का रहस्यमय गुमनामी भी उन्हीं में से एक है।
Netaji Files: ममता बनर्जी ने केंद्र से की बड़ी अपील, ‘नेताजी से जुड़ी सभी फाइलें सार्वजनिक करें’
क्या सुलझेगी Netaji Files की गुत्थी?
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए एक बार फिर केंद्र सरकार से बड़ी अपील की है। उन्होंने कहा कि नेताजी से संबंधित सभी शेष दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि दशकों से अनसुलझा यह रहस्य सामने आ सके।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर पोस्ट कर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने लिखा, “देशनायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर मैं उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि और नमन अर्पित करती हूं।” उन्होंने आगे कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि नेताजी के लापता होने का रहस्य आज भी बरकरार है। वर्ष 1945 के बाद उनके साथ क्या हुआ, इसकी जानकारी आज तक किसी के पास नहीं है, जो सभी के लिए अत्यंत दुखद है। इस विशेष नेताजी जयंती के अवसर पर, यह अपील और भी प्रासंगिक हो जाती है।
बंगाल सरकार ने पहले ही खोले थे रहस्य के द्वार
ममता बनर्जी ने इस बात पर जोर दिया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी सभी राज्य स्तरीय फाइलें बहुत पहले ही सार्वजनिक कर दी थीं। उन्होंने कहा, “मैं भारत सरकार से एक बार फिर अनुरोध करती हूं कि नेताजी से संबंधित सभी गोपनीय जानकारियों को सार्वजनिक किया जाए, क्योंकि नेताजी बंगाल ही नहीं, बल्कि पूरे भारत और विश्व भर के लोगों की भावनाओं से गहराई से जुड़े हैं। लोग उन्हें कभी भूले नहीं और न ही कभी भूलेंगे।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मुख्यमंत्री ने नेताजी के समावेशी भारत के सपने को भी याद किया। उन्होंने बताया कि नेताजी का मानना था कि यह देश सिर्फ हिंदुओं या मुसलमानों का नहीं है, बल्कि पुरुषों और महिलाओं, हिंदुओं, मुसलमानों, सिखों, ईसाइयों, पंजाबी, तमिल, गुजराती और बंगालियों—सभी का है। उन्होंने नेताजी की आजाद हिंद फौज को धर्मनिरपेक्षता और भाईचारे का प्रतीक बताया, जहाँ जाति, धर्म या लिंग का कोई भेद नहीं था।
एकता और भाईचारे के प्रतीक नेताजी
ममता बनर्जी ने अपने संदेश में कहा, “यदि हम वास्तव में नेताजी को सच्चा सम्मान देना चाहते हैं, तो यह हमारा कर्तव्य है कि हम उनकी एकता, भाईचारे और सद्भाव के आदर्शों का पालन करें, चाहे हमारी जाति, धर्म या लैंगिक पहचान कुछ भी हो। हम सभी भारतीय हैं—यही हमारी सर्वोच्च पहचान है।” उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/।
अपनी सरकार द्वारा नेताजी को सम्मान देने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि अलीपुर जेल में जिस कोठरी में नेताजी को बंद किया गया था, उसकी मरम्मत कर अब उसे एक दर्शनीय स्थल के रूप में जनता के लिए खोला गया है। इसके अलावा, नेताजी पर कई प्रदर्शनियां आयोजित की गई हैं और उनकी मशहूर पुस्तक ‘तरुण के स्वप्न’ का कई भाषाओं में अनुवाद भी कराया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मुख्यमंत्री ने ‘तरुणेर स्वप्न’ नामक एक विशेष परियोजना का भी उल्लेख किया। इस योजना के तहत सरकारी स्कूलों के 11वीं कक्षा के छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में मदद करने के लिए मोबाइल फोन या टैबलेट खरीदने के लिए 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो नेताजी के शिक्षा और युवा सशक्तिकरण के दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह योजना नेताजी के आदर्शों को जीवित रखने का एक प्रयास है, और ऐसी ही पहलें हर नेताजी जयंती पर हमें उनके प्रति सच्ची कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





