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Chandra Grahan 2026: होली पर दुर्लभ चंद्र ग्रहण का संयोग, जानिए ग्रहण का साया, कब मनेगा यह पावन पर्व!

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Chandra Grahan 2026: ब्रह्मांड में घटित होने वाली खगोलीय घटनाएँ जहाँ एक ओर वैज्ञानिक उत्सुकता का केंद्र होती हैं, वहीं ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इनका गहरा आध्यात्मिक महत्व भी होता है। वर्ष 2026 में होली के पावन पर्व के समीप एक ऐसा ही दुर्लभ चंद्र ग्रहण का संयोग बनने जा रहा है, जिसका प्रभाव होलिका दहन और रंगों की होली की निर्धारित तिथियों पर पड़ने की संभावना है।

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चंद्र ग्रहण 2026: होली पर ग्रहण का साया, जानें कब मनेगा यह पावन पर्व

Chandra Grahan 2026: होली और ग्रहण का ज्योतिषीय प्रभाव

ब्रह्मांड की लीलाएं अद्भुत और अगम्य हैं। जब भी कोई ग्रह अपनी चाल बदलता है या खगोलीय घटना घटित होती है, उसका सीधा असर पृथ्वी और उस पर निवास करने वाले जीवों पर पड़ता है। वर्ष 2026 में, होली के पावन पर्व के ठीक पहले लगने वाला चंद्र ग्रहण एक ऐसा ही विशेष संयोग है, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दुर्लभ घटना के कारण होलिका दहन की तिथि और उसके अगले दिन मनाई जाने वाली रंगों की होली के आयोजन में बदलाव संभव है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण काल को किसी भी शुभ कार्य के लिए वर्जित माना गया है, विशेषकर भारत में इसका गहरा प्रभाव देखा जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, जब चंद्र ग्रहण लगता है, तो पृथ्वी और चंद्रमा के बीच के संबंध प्रभावित होते हैं, जिसका सीधा असर हमारे दैनिक जीवन और पर्व-त्योहारों पर भी पड़ता है। चंद्र ग्रहण से पूर्व लगने वाला सूतक काल धार्मिक अनुष्ठानों और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। इस अवधि में मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं और किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। यही कारण है कि 2026 में होली से पहले पड़ने वाला चंद्र ग्रहण, होलिका दहन की तिथि को प्रभावित कर सकता है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें (https://deshajtimes.com/news/dharm-adhyatm/)।

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शास्त्रों के अनुसार, होलिका दहन पूर्णिमा की रात्रि को भद्रा रहित काल में ही किया जाता है, और यदि इस अवधि में ग्रहण का सूतक काल भी प्रभावी हो जाए, तो दहन की तिथि में परिवर्तन अनिवार्य हो जाता है। इसी प्रकार, रंगों की होली भी होलिका दहन के अगले दिन ही खेली जाती है, अतः यदि होलिका दहन की तिथि में बदलाव आता है, तो रंगों की होली की तारीख भी उसी अनुसार आगे बढ़ जाएगी। यह स्थिति भक्तों के लिए थोड़ी उलझन भरी हो सकती है, किन्तु शास्त्रों के नियमों का पालन करना परम आवश्यक है। देशज टाइम्स बिहार का N0.1 आपको सदैव प्रामाणिक जानकारी प्रदान करता है।

ऐसे में, विद्वान ज्योतिषियों और पंचांग निर्माताओं द्वारा चंद्र ग्रहण के सभी पहलुओं पर विचार-विमर्श के बाद ही होली की सही और अंतिम तिथियों की घोषणा की जाएगी। यह आवश्यक है कि सभी श्रद्धालु इन घोषणाओं पर ध्यान दें और शास्त्रीय नियमों का पूर्णतः पालन करें। ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचने और पर्व की पवित्रता बनाए रखने के लिए, ग्रहण काल समाप्त होने के उपरांत गंगाजल से स्नान कर, दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। इस दौरान अपने इष्ट देव का स्मरण करें और शांति व धैर्य बनाए रखें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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