
Bihar Mid Day Meal Scheme: चूल्हा जलता रहा, पकते रहे बच्चों के सपने, मगर जिसने आग जलाई, उसके ही सम्मान पर आंच आने लगी। अब बिहार के शिक्षा विभाग ने एक सख्त फरमान जारी कर उन हाथों को सम्मान देने की ठानी है, जो हर दिन हजारों बच्चों का पेट भरते हैं।
Bihar Mid Day Meal Scheme: बिहार के स्कूलों में अब रसोईया से नहीं करा सकेंगे अतिरिक्त काम, शिक्षा विभाग का कड़ा आदेश
Bihar Mid Day Meal Scheme: रसोइयों के सम्मान पर आंच, अब नहीं सहेंगे!
बिहार के सरकारी स्कूलों में चल रही मध्याह्न भोजन योजना में वर्षों से रसोईया-सह-सहायक के साथ होने वाला अनुचित व्यवहार और अतिरिक्त कार्य करवाने की शिकायतें अब इतिहास बनने वाली हैं। लगातार मिल रही इन शिकायतों को बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लिया है और इस संबंध में एक कड़ा आदेश जारी किया है। निदेशालय ने साफ कर दिया है कि रसोईया-सह-सहायक से मध्याह्न भोजन से जुड़े कार्यों के अलावा कोई भी अन्य काम लेना नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा। ऐसा करने वाले संबंधित पदाधिकारियों पर अब कार्रवाई तय है।
मध्याह्न भोजन योजना के निदेशक विनायक मिश्र (भा.प्र.से.) द्वारा सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को संचिका संख्या म.भो. को-ES-57/2012 अंश-235 के तहत यह निर्देश जारी किया गया है। पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि निदेशालय ने पूर्व में पत्रांक 501, दिनांक 19 मार्च 2018 को भी ऐसे आदेश जारी किए थे, जिनमें रसोईया-सह-सहायक से केवल भोजन पकाने, परोसने और बर्तनों की साफ-सफाई जैसे कार्य ही लेने और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने को कहा गया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अतिरिक्त कार्यों से मुक्ति और सम्मान की वापसी
इसके बावजूद, बिहार राज्य मध्याह्न भोजन योजना रसोईया संघ के माध्यम से यह शिकायत प्राप्त हुई कि कई विद्यालयों में रसोइयों से विद्यालय परिसर, कमरों और शौचालयों की साफ-सफाई जैसे अतिरिक्त कार्य कराए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, कई जगहों पर उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार भी नहीं हो रहा था, जो न केवल नियमों के बल्कि मानवीय मूल्यों के भी खिलाफ है। शिकायतों में यह भी कहा गया कि रसोईया-सह-सहायक की नियुक्ति विशेष रूप से मध्याह्न भोजन योजना के तहत निर्धारित कार्यों के लिए की गई है, लेकिन उन्हें अक्सर अन्य स्कूल कार्यों में लगा दिया जाता है। इससे न केवल उनका समय और श्रम व्यर्थ होता है, बल्कि बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी भी प्रभावित होती है।
निदेशालय ने इस स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने स्तर से प्रधानाध्यापकों और प्रभारी प्रधानाध्यापकों को स्पष्ट रूप से आदेश दें कि रसोईया-सह-सहायक से मध्याह्न भोजन योजना से इतर कोई भी कार्य न कराया जाए। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि विद्यालयों में उनके साथ गरिमापूर्ण और सम्मानजनक व्यवहार हो। इसके अतिरिक्त, उनसे स्कूल परिसर की सफाई, कमरों में झाड़ू लगवाने और शौचालयों की साफ-सफाई जैसे अतिरिक्त कार्य भी कराए जा रहे थे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इन सब से उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है और वे अपनी मुख्य जिम्मेदारी से भटक जाते हैं। यह आदेश केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर भी इसका अनुपालन हो, यह सुनिश्चित करना भी एक बड़ी चुनौती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। निदेशालय ने इस स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने स्तर से प्रधानाध्यापक और प्रभारी प्रधानाध्यापक को स्पष्ट रूप से आदेश दें कि रसोईया-सह-सहायक से मध्याह्न भोजन योजना से इतर कोई भी कार्य न कराया जाए।
शिक्षा विभाग की नई पहल: क्या बदलेगी विद्यालयों की तस्वीर?
निदेशालय का मानना है कि रसोईया-सह-सहायक विद्यालय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनकी भूमिका बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित है। उनसे अन्य कार्य कराना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि उनकी कार्य-दक्षता और मनोबल पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। इससे उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि कई बार उन्हें भारी काम या असुविधाजनक परिस्थितियों में काम करना पड़ता है।
शिक्षा विभाग के इस आदेश के बाद यह स्पष्ट संकेत मिल गया है कि यदि किसी विद्यालय में रसोईया-सह-सहायक से अतिरिक्त कार्य कराया गया, तो संबंधित प्रधानाध्यापक या पदाधिकारी पर कार्रवाई तय मानी जाएगी। यानी अब रसोईया से अन्य काम कराना प्रशासनिक रूप से "महंगा" साबित हो सकता है। वर्तमान में बिहार के कई जिलों में मध्याह्न भोजन योजना के तहत स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में कई सुधार किए जा रहे हैं। इसके बावजूद रसोईया-सह-सहायक से अतिरिक्त काम लेने की शिकायतें योजना की साख और उद्देश्य पर सवाल उठाती हैं। शिक्षा विभाग ने भी यह मान्यता दी है कि रसोईया-सह-सहायक का सम्मान और उनकी गरिमा बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि वे सीधे तौर पर बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े हुए हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस आदेश से यह स्पष्ट संदेश गया है कि रसोईया-सह-सहायक को उनका उचित सम्मान और गरिमा मिले, जो किसी भी मानवीय व्यवस्था का मूल आधार है।
इस आदेश के बाद यह अपेक्षा की जा रही है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी और स्कूल प्रबंधन इस दिशा में सतर्कता बढ़ाएंगे और रसोईया-सह-सहायक से संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित करेंगे। साथ ही, यदि किसी स्कूल में नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मध्याह्न भोजन योजना के तहत रसोईया-सह-सहायक की भूमिका बच्चों को नियमित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। ऐसे में उनसे अन्य कार्य करवाना न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि यह बच्चों के भोजन की गुणवत्ता और वितरण में भी बाधा डाल सकता है। बिहार सरकार की यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है ताकि योजना के मूल उद्देश्य को सुरक्षित रखा जा सके और रसोईया-सह-सहायक को उनके अधिकार एवं सम्मान मिल सके।
इस आदेश के बाद उम्मीद की जा रही है कि स्कूलों में रसोईया-सह-सहायक से अन्य काम कराने की घटनाओं में कमी आएगी और उन्हें उनके निर्धारित कार्यों के अलावा किसी भी प्रकार के अतिरिक्त कार्य के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। साथ ही, स्कूलों में उनका सम्मान और गरिमा बनाए रखने का भी कड़ा पालन सुनिश्चित होगा।




