
Basant Panchami: आस्था का सूरज जब बसंत की पहली किरण लेकर उगता है, तो धरती भक्ति के पीले रंग में सराबोर हो जाती है। कुशेश्वरस्थान की धरती पर भी कुछ ऐसा ही नज़ारा दिखा, जहां शिवभक्ति का समंदर उमड़ पड़ा।
कुशेश्वरस्थान पूर्वी में स्थित आस्था के महान केंद्र, बाबा कुशेश्वरनाथ धाम में वसंत पंचमी के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं का तांता लग गया। अहले सुबह से ही पूरा इलाका ‘बोल बम – बोल बम’, ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘जय कुशेश्वरनाथ’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। दूर-दूर से आए कांवड़ियों की टोलियां गाजे-बाजे के साथ झूमते-नाचते बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचीं।
Basant Panchami पर बाबा धाम में उमड़ा आस्था का जनसैलाब
इस पवित्र दिन पर बाबा भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए भक्तों में एक अलग ही उत्साह देखने को मिला। कई श्रद्धालु सिमरिया से गंगाजल लेकर नंगे पांव बाबा नगरी पहुंचे थे। मुख्य पूजा से पहले, भक्तों ने शिव गंगा घाट में पवित्र स्नान किया और फिर मंदिर परिसर में स्थित चन्द्रकूप से जल भरकर बाबा के दर्शन के लिए लंबी कतारों में लग गए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। घंटों के इंतजार के बाद जब उनकी बारी आई, तो उन्होंने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ शिवलिंग पर जल अर्पित किया।
मंदिर के गर्भगृह से लेकर पूरे परिसर में घंटियों की गूंज और भक्तों के जयकारे एक दिव्य वातावरण बना रहे थे। हर किसी के चेहरे पर बाबा के प्रति अटूट विश्वास और श्रद्धा का भाव स्पष्ट झलक रहा था।
कड़ी सुरक्षा के बीच भक्तों ने की पूजा-अर्चना
भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। गर्भगृह से लेकर मंदिर परिसर के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी तैनात थे ताकि किसी भी श्रद्धालु को कोई परेशानी न हो। सुल्तानगंज से जल लेकर आए एक भक्त ने बताया कि “बाबा कुशेश्वरनाथ हर किसी की मनोकामना पूरी करते हैं। हम हर साल यहां इसी विश्वास के साथ आते हैं और बाबा का आशीर्वाद लेकर जाते हैं।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इस विशेष अवसर पर होने वाले जलाभिषेक का खास महत्व माना जाता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। कुशेश्वरस्थान धाम के अलावा, सलमगढ़ शिवमंदिर और तिलकेश्वर शिव मंदिर में भी देर शाम तक भक्तों की भारी भीड़ लगी रही और पूजा-अर्चना का दौर चलता रहा।






