
Rath Saptami 2026: माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाए जाने वाले रथ सप्तमी पर्व का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। यह पर्व भगवान सूर्य देव को समर्पित है और इस दिन उनकी उपासना से आरोग्य, धन और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
Rath Saptami 2026: जानें कब है सूर्य उपासना का महापर्व, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
Rath Saptami 2026: माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाए जाने वाले रथ सप्तमी पर्व का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। यह पर्व भगवान सूर्य देव को समर्पित है और इस दिन उनकी उपासना से आरोग्य, धन और संतान सुख की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। शास्त्रों के अनुसार, इसी दिन भगवान सूर्य ने पूरे विश्व को प्रकाशित करना प्रारंभ किया था, इसलिए इस तिथि को ‘सूर्य जयंती’ और ‘अचला सप्तमी’ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देने का विधान है, जिससे सभी पापों का नाश होता है।
Rath Saptami 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में रथ सप्तमी की तिथि को लेकर भक्तों में कुछ दुविधा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि का आरंभ 25 जनवरी 2026, रविवार की रात्रि 10 बजकर 14 मिनट पर होगा और यह तिथि 27 जनवरी 2026, मंगलवार की मध्यरात्रि 12 बजकर 09 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के मान से, रथ सप्तमी का पावन पर्व 26 जनवरी 2026, सोमवार को ही मनाया जाएगा। इस दिन सूर्योदय के साथ ही स्नान और अर्घ्य का महत्व आरंभ हो जाता है।
पूजा विधि
रथ सप्तमी के दिन भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना विशेष फलदायी होती है। इस दिन निम्न विधि से पूजन करें:
- प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करें। यदि यह संभव न हो, तो घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।
- स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय ‘ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणाय मन वांछित फलम् देहि देहि स्वाहा’ मंत्र का जाप करें।
- सूर्य को अर्घ्य देने के लिए तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, लाल फूल और अक्षत डालकर इस्तेमाल करें।
- इसके बाद भगवान सूर्य की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और उन्हें लाल चंदन, कुमकुम, अक्षत, लाल फूल, गुड़ और घी का दीपक अर्पित करें।
- सूर्य चालीसा का पाठ करें और आदित्य हृदय स्तोत्र का जाप करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
- इस दिन नमक का सेवन वर्जित होता है। दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। गरीब और जरूरतमंदों को वस्त्र, अन्न और गुड़ का दान करें।
- संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले जातक इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा करें और व्रत रखें।
शुभ मुहूर्त
चूंकि रथ सप्तमी उदया तिथि के अनुसार 26 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी, इस दिन के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
| विवरण | समय |
|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्त | प्रातः 05:20 बजे से 06:10 बजे तक |
| सूर्योदय | प्रातः 07:12 बजे |
| रवि योग | प्रातः 07:12 बजे से रात्रि 10:48 बजे तक |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 02:08 बजे से 02:50 बजे तक |
रथ सप्तमी का महत्व
शास्त्रों में रथ सप्तमी को ‘आरोग्य सप्तमी’ भी कहा गया है। मान्यता है कि इस दिन सूर्य उपासना करने से व्यक्ति को गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है और वह निरोगी रहता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। निसंतान दंपति इस दिन व्रत रखकर भगवान सूर्य की आराधना करें, तो उन्हें शीघ्र ही संतान सुख प्राप्त होता है।
सूर्य देव का मंत्र
रथ सप्तमी के दिन भगवान सूर्य को प्रसन्न करने के लिए इस मंत्र का जाप करें:
ॐ घृणि सूर्याय नमः।
या
एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणाघ्र्यं दिवाकर।।
निष्कर्ष और उपाय
रथ सप्तमी का यह पावन पर्व हमें भगवान सूर्य की ऊर्जा और प्रकाश का स्मरण कराता है। इस दिन सच्ची श्रद्धा और भक्ति से की गई सूर्य देव की उपासना जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि लाती है। इस दिन लाल वस्त्र धारण करना और लाल वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। जीवन में सुख-शांति और निरोगी काया के लिए रथ सप्तमी पर भगवान सूर्य की आराधना अवश्य करें। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/dharm-adhyatm/





