
Shani Dev: ज्योतिष शास्त्र में कर्मफल दाता शनिदेव का विशेष स्थान है। उनकी कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और उनके रुष्ट होने पर व्यक्ति को कई प्रकार की बाधाओं का सामना करना पड़ता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यदि आप भी शनिदेव को प्रसन्न कर उनकी असीम कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो यह आलेख आपके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
शनि देव की कृपा पाने का दिव्य मार्ग: जपें उनके 108 पवित्र नाम
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि ग्रह का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर गहरा असर डालता है। उनकी साढ़ेसाती और ढैय्या के दौरान व्यक्तियों को कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में, शनिदेव के 108 नामों का नियमित जाप अत्यंत फलदायी माना गया है। इन पवित्र नामों का स्मरण करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी दुख-दर्द दूर करते हैं। यह जाप न केवल शनि दोष के प्रभावों को कम करता है, बल्कि कुंडली में शनि की स्थिति को भी मजबूत बनाता है, जिससे जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें
शनि देव के 108 नामों का जाप: ग्रहों के अशुभ प्रभाव से मुक्ति
शनिदेव के इन 108 नामों का नियमित पाठ करने से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और शांति प्राप्त होती है। आइए जानें शनिदेव के ये पवित्र नाम:
१. ॐ शनैश्चराय नमः। २. ॐ शान्ताय नमः। ३. ॐ सर्वाभीष्टप्रदायिने नमः। ४. ॐ शरण्याय नमः। ५. ॐ वरेण्याय नमः। ६. ॐ सर्वेशाय नमः। ७. ॐ सौम्याय नमः। ८. ॐ सुरवन्द्याय नमः। ९. ॐ सुरलोकविहारिणे नमः। १०. ॐ सुखासनोपविष्टाय नमः। ११. ॐ सुन्दराय नमः। १२. ॐ घनाय नमः। १३. ॐ घनरूपाय नमः। १४. ॐ घनाभरणधारिणे नमः। १५. ॐ घनसारविलेपाय नमः। १६. ॐ खद्योताय नमः। १७. ॐ मन्दाय नमः। १८. ॐ मन्दचेष्टाय नमः। १९. ॐ महनीयगुणात्मने नमः। २०. ॐ मर्त्यपावनपादाय नमः। २१. ॐ महेशाय नमः। २२. ॐ महर्षिपूज्याय नमः। २३. ॐ वरप्रदाय नमः। २४. ॐ शुभ्राय नमः। २५. ॐ नित्यय नमः। २६. ॐ निरामायाय नमः। २७. ॐ निराधाराय नमः। २८. ॐ निरञ्जनाय नमः। २९. ॐ निरामयाय नमः। ३०. ॐ निर्वल्लमूर्ति नमः। ३१. ॐ अरुष्काय नमः। ३२. ॐ गम्भीराय नमः। ३३. ॐ वयासायाय नमः। ३४. ॐ वन्द्याय नमः। ३५. ॐ निरनिष्टदाय नमः। ३६. ॐ भीमाय नमः। ३७. ॐ भीमदृश्टये नमः। ३८. ॐ भीमरूपाय नमः। ३९. ॐ भयंकरम नमः। ४०. ॐ भासकराय नमः। ४१. ॐ विष्टाय नमः। ४२. ॐ स्तवन प्रियाय नमः। ४३. ॐ स्तव्यय नमः। ४४. ॐ स्तवन शक्ति नमः। ४५. ॐ स्तुतिपात्राय नमः। ४६. ॐ स्तुतये नमः। ४७. ॐ स्तवनकर्त्रे नमः। ४८. ॐ स्तव्यरूपाप नमः। ४९. ॐ स्तुत्यरूपाय नमः। ५०. ॐ स्तव्यपादप्रभवे नमः। ५१. ॐ सर्वलोकैक नमः। ५२. ॐ सेव्याय नमः। ५३. ॐ सर्वलोकैकवन्दित नमः। ५४. ॐ सर्व लोकैकपूज्याय नमः। ५५. ॐ सर्व लोकैकवरप्रदाय नमः। ५६. ॐ सर्व लोकैकधराधार नमः। ५७. ॐ सर्व लोकैकपिता नमः। ५८. ॐ सर्व लोकैकमाता नमः। ५९. ॐ सर्व लोकैकसुखप्रदाय नमः। ६०. ॐ सर्व लोकैकपालकाय नमः। ६१. ॐ सर्व लोकैकनन्दिताय नमः। ६२. ॐ सर्व लोकैकधर्मप्रवर्तकाय नमः। ६३. ॐ सर्व लोकैकमोक्षदाय नमः। ६४. ॐ सर्व लोकैकज्ञानप्रदाय नमः। ६५. ॐ सर्व लोकैकविद्याप्रदाय नमः। ६६. ॐ सर्व लोकैककलाप्रदाय नमः। ६७. ॐ सर्व लोकैकसुखप्रदाय नमः। ६८. ॐ सर्व लोकैकधनप्रदाय नमः। ६९. ॐ सर्व लोकैकआयुप्रदाय नमः। ७०. ॐ सर्व लोकैक आरोग्यप्रदाय नमः। ७१. ॐ सर्व लोकैकसन्तानप्रदाय नमः। ७२. ॐ सर्व लोकैक विजयप्रदाय नमः। ७३. ॐ सर्व लोकैक कीर्तिप्रदाय नमः। ७४. ॐ सर्व लोकैक ऐश्वर्यप्रदाय नमः। ७५. ॐ सर्व लोकैक सौन्दर्यप्रदाय नमः। ७६. ॐ सर्व लोकैक पुण्यप्रदाय नमः। ७७. ॐ सर्व लोकैक पावनप्रदाय नमः। ७८. ॐ सर्व लोकैक मंगलप्रदाय नमः। ७९. ॐ सर्व लोकैक शुभप्रदाय नमः। ८०. ॐ सर्व लोकैक शान्तिप्रदाय नमः। ८१. ॐ सर्व लोकैक समताप्रदाय नमः। ८२. ॐ सर्व लोकैक समत्वप्रदाय नमः। ८३. ॐ सर्व लोकैक सिद्धप्रदाय नमः। ८४. ॐ सर्व लोकैक मुक्तिप्रदाय नमः। ८५. ॐ सर्व लोकैक ब्रह्मप्रदाय नमः। ८६. ॐ सर्व लोकैक विष्णुप्रदाय नमः। ८७. ॐ सर्व लोकैक शिवप्रदाय नमः। ८८. ॐ सर्व लोकैक शक्तिप्रदाय नमः। ८९. ॐ सर्व लोकैक गणपतिप्रदाय नमः। ९०. ॐ सर्व लोकैक स्कन्दप्रदाय नमः। ९१. ॐ सर्व लोकैक सूर्यप्रदाय नमः। ९२. ॐ सर्व लोकैक चन्द्रप्रदाय नमः। ९३. ॐ सर्व लोकैक भौमप्रदाय नमः। ९४. ॐ सर्व लोकैक बुधप्रदाय नमः। ९५. ॐ सर्व लोकैक गुरुप्रदाय नमः। ९६. ॐ सर्व लोकैक शुक्रप्रदाय नमः। ९७. ॐ सर्व लोकैक राहुप्रदाय नमः। ९८. ॐ सर्व लोकैक केतुप्रदाय नमः। ९९. ॐ सर्व लोकैक नवग्रहप्रदाय नमः। १००. ॐ सर्व लोकैक देवेन्द्राय नमः। १०१. ॐ सर्व लोकैक देवरूपाय नमः। १०२. ॐ सर्व लोकैक देवतात्मने नमः। १०३. ॐ सर्व लोकैक देवसेनाय नमः। १०४. ॐ सर्व लोकैक देवपूजिताय नमः। १०५. ॐ सर्व लोकैक देववन्दिताय नमः। १०६. ॐ सर्व लोकैक देवस्तुताय नमः। १०७. ॐ सर्व लोकैक देवसेविताय नमः। १०८. ॐ सर्व लोकैक देवाधीशानाय नमः।
इन 108 नामों का श्रद्धापूर्वक जाप करने से व्यक्ति शनिदेव की क्रूर दृष्टि से बचकर उनकी कृपा का पात्र बनता है। शनिवार के दिन, स्नान आदि से निवृत्त होकर, स्वच्छ वस्त्र धारण कर, शनि मंदिर में या अपने घर के पूजा स्थान पर शनिदेव की प्रतिमा या चित्र के समक्ष सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें। इसके उपरांत, शांत मन से इन नामों का 108 बार जाप करें। ऐसा करने से न केवल शनि दोष शांत होते हैं, बल्कि जीवन में आने वाली बाधाएं भी दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह जाप आपको आत्मिक शांति प्रदान करेगा और शनिदेव की असीम अनुकंपा आप पर सदैव बनी रहेगी।





