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मार्च, 19, 2026
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अब Bihar को भी गंगा के जल में मिलेगी हिस्सेदारी…30 साल बाद India-Bangladesh Water Treaty से जगी बिहार की आस, पहली बार मिलेगा 900 क्यूसेक पानी!

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India-Bangladesh Water Treaty: गंगा के पानी पर दशकों से अपने हक़ का इंतज़ार कर रहे बिहार के लिए उम्मीद की एक नई सुबह होने वाली है। 30 साल पुराने समझौते की समाप्ति के साथ, अब बिहार को भी गंगा के जल में अपनी हिस्सेदारी मिलने की प्रबल संभावना बन गई है।

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जल शक्ति मंत्रालय द्वारा गठित एक आंतरिक समिति ने यह सिफारिश की है कि बिहार को शुष्क मौसम के दौरान गंगा नदी से 900 क्यूसेक पानी मिलना चाहिए। यह पहली बार है जब बिहार के लिए गंगा जल में एक निश्चित हिस्सेदारी की बात आधिकारिक तौर पर आगे बढ़ी है, क्योंकि अब तक इस मामले में बिहार का कोई हिस्सा तय नहीं था। शुष्क अवधि जनवरी से मई तक मानी जाती है, जब पानी की मांग सबसे ज़्यादा होती है।

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अब Bihar को भी गंगा के जल में मिलेगी हिस्सेदारी...30 साल बाद India-Bangladesh Water Treaty से जगी बिहार की आस, पहली बार मिलेगा 900 क्यूसेक पानी!

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India-Bangladesh Water Treaty का नवीनीकरण और बिहार की हिस्सेदारी

भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल के बंटवारे को लेकर 30 साल पहले हुई संधि इस साल 12 दिसंबर को समाप्त हो रही है। इस संधि के नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसके तहत दोनों देश गंगा में पानी की मौजूदा उपलब्धता का आकलन कर रहे हैं। बिहार ने इस नए समझौते में एक पक्षकार बनने और लगभग 2000 क्यूसेक पानी की हिस्सेदारी की उम्मीद जताई थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। समिति की 900 क्यूसेक की सिफारिश इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, अंतिम फैसला संधि के नवीनीकरण के बाद ही स्पष्ट होगा।

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दक्षिणी बिहार के लिए क्यों अहम है यह पानी?

प्रस्तावित नई संधि से बिहार को अपने दक्षिणी क्षेत्र के लिए पानी की ज़रूरतें पूरी करने की आशा बंधी है। यह ज़रूरत न केवल पेयजल परियोजनाओं से जुड़ी है, बल्कि सिंचाई के लिए भी यह पानी महत्वपूर्ण होगा। बिहार की कई पेयजल परियोजनाएं गंगा पर निर्भर हैं। इसके अलावा, दक्षिणी बिहार के जलाशयों को भरने के लिए पाइपलाइन के ज़रिए गंगा का पानी पहुँचाने का भी प्रस्ताव है, जिस पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के साथ बातचीत चल रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

बिहार के लिए गंगा जल का बंटवारा हमेशा से एक दोहरी चुनौती रहा है। इसका मुख्य कारण मुर्शिदाबाद में बना फरक्का बराज है, जिसके कारण नदी में गाद जमा होती है। इससे शुष्क मौसम में पानी की कमी और मानसून में बाढ़ की स्थिति बनती है। पुराने समझौते में बिहार को शामिल नहीं किया गया था, जिससे राज्य के हितों की अनदेखी होती रही। फरक्का बराज का निर्माण 1975 में हुगली नदी में पानी मोड़कर कोलकाता बंदरगाह की नौ-वहन क्षमता बनाए रखने के लिए किया गया था।

कैसे होता है मौजूदा जल बंटवारा?

12 दिसंबर, 1996 को हुई संधि के तहत गंगा जल के बंटवारे का एक फार्मूला तय किया गया था। इस फार्मूले के लिए गंगा पर बने फरक्का बराज और बांग्लादेश (जहां गंगा को पद्मा कहते हैं) में हार्डिंग ब्रिज पर पानी के स्तर की संयुक्त माप की जाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मौजूदा बंटवारे का फार्मूला इस प्रकार है:

  • अगर फरक्का पर पानी का बहाव 70,000 क्यूसेक या उससे कम हो, तो भारत और बांग्लादेश को 50-50 प्रतिशत पानी मिलता है।
  • बहाव 70,000 से 75,000 क्यूसेक के बीच होने पर बांग्लादेश को 35,000 क्यूसेक और शेष पानी भारत को मिलता है।
  • यदि बहाव 75,000 क्यूसेक से अधिक होता है, तो भारत 40,000 क्यूसेक रखता है और बाकी पानी बांग्लादेश को दिया जाता है।
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अब नए समझौते में बिहार की हिस्सेदारी तय होने से राज्य में जल संकट का एक बड़ा समाधान हो सकता है।

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