JEE Advanced: आईआईटी में दाखिले की राह तय करने वाली जेईई एडवांस परीक्षा में जल्द ही बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यह परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाती है और हर साल लाखों छात्र इसकी तैयारी करते हैं। अब केंद्र सरकार और आईआईटी प्रशासन मिलकर इस परीक्षा के पैटर्न को और बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। प्रस्तावित बदलावों का मकसद यह है कि परीक्षा सिर्फ रटने की ताकत न जांचे, बल्कि छात्रों की सोच, समझ और समस्या सुलझाने की क्षमता को भी परखे।
JEE Advanced परीक्षा पैटर्न में बड़े बदलाव की तैयारी, छात्रों को मिलेगी राहत?
JEE Advanced: नई सोच और तार्किक क्षमता पर जोर
अब तक जेईई एडवांस की परीक्षा पूरी तरह फिजिक्स, केमेस्ट्री और मैथमेटिक्स यानी पीसीएम पर आधारित रहती थी। लेकिन नए प्रस्ताव के तहत इसमें तार्किक क्षमता और एप्टीट्यूड से जुड़े सवाल भी जोड़े जा सकते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि आने वाले समय में छात्रों से ऐसे सवाल पूछे जाएंगे, जिनमें उन्हें सोचकर हल निकालना होगा। इससे यह देखा जा सकेगा कि छात्र किसी समस्या को किस तरह समझता है और उसका समाधान कैसे करता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परीक्षा पैटर्न में कई छात्र केवल सवालों के पैटर्न याद करके परीक्षा पास करने की कोशिश करते हैं। नए बदलावों से यह तरीका काम नहीं आएगा। तार्किक और एप्टीट्यूड सवालों के आने से छात्रों को विषय की गहरी समझ विकसित करनी होगी। इससे परीक्षा का स्तर ज्यादा व्यावहारिक होगा और सही मायने में योग्य छात्रों का चयन हो सकेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सुधार की जिम्मेदारी और कार्ययोजना
जेईई एडवांस में सुधार की पूरी जिम्मेदारी ज्वाइंट एडमिशन बोर्ड को सौंपी गई है। इसके लिए आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल की अध्यक्षता में एक विशेष समिति बनाई गई है। इस समिति में आईआईटी के कई वरिष्ठ शिक्षक और शिक्षा विशेषज्ञ शामिल हैं। समिति अगले छह महीने में परीक्षा सुधार का पूरा खाका तैयार करेगी।
समिति की रिपोर्ट आने के बाद सीधे नया पैटर्न लागू नहीं किया जाएगा। पहले एक पायलट परीक्षा कराई जाएगी। इसके नतीजों का गहराई से अध्ययन किया जाएगा और देखा जाएगा कि छात्रों पर इसका क्या असर पड़ता है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से नए बदलाव लागू किए जाएंगे, ताकि छात्रों को अचानक किसी परेशानी का सामना न करना पड़े। लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें।
साल में कई बार परीक्षा का प्रस्ताव
फिलहाल जेईई एडवांस साल में सिर्फ एक बार आयोजित होती है। लेकिन नए प्रस्ताव के तहत इसे साल में दो से चार बार कराने पर भी विचार किया जा रहा है। यह व्यवस्था जेईई मेन की तरह हो सकती है, जहां परीक्षा अलग-अलग तारीखों और स्लॉट में होती है। इससे छात्रों को अपनी सुविधा के अनुसार परीक्षा देने का मौका मिलेगा और एक ही दिन का दबाव कम होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
एक से ज्यादा बार परीक्षा होने से छात्रों पर मानसिक दबाव भी कम हो सकता है। अगर किसी कारण से एक बार परीक्षा ठीक नहीं जाती है, तो छात्र को दोबारा मौका मिलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे बेहतर तैयारी के साथ परीक्षा दे सकेंगे।
एप्टीट्यूड और तार्किक सवालों के शामिल होने से पीसीएम के सवालों की संख्या में थोड़ी कमी आ सकती है। हालांकि फिजिक्स, केमेस्ट्री और मैथमेटिक्स की अहमियत बनी रहेगी। नए तरह के सवाल इन विषयों को रोजमर्रा की समस्याओं से जोड़कर पूछे जा सकते हैं, ताकि छात्रों की असली समझ सामने आ सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।







