
Shiv Guru Mahotsav: कुशेश्वरस्थान की धरती पर आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि सड़कों पर तिल रखने की भी जगह न बची। मौका था गोलमा गांव में आयोजित भव्य शिव गुरु महोत्सव का, जहां गुरु-शिष्य परंपरा की एक अनूठी धारा देखने को मिली।
कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड के तिलकेश्वर पंचायत स्थित गोलमा गांव बुधवार को आस्था के महाकुंभ का गवाह बना। यहां शिव शिष्य हरीन्द्रानन्द फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक दिवसीय भव्य Shiv Guru Mahotsav में भाग लेने के लिए एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। आलम यह था कि कार्यक्रम स्थल की ओर जाने वाले सभी रास्ते भक्तों से खचाखच भर गए थे। यह आयोजन महेश्वर शिव के गुरु स्वरुप से प्रत्येक व्यक्ति का शिष्य के रूप में जुड़ाव हो सके, इसी उद्देश्य से किया गया।
गोलमा में आयोजित Shiv Guru Mahotsav में क्या बोलीं मुख्य वक्ता?
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता दीदी बरखा आनंद ने साहब हरीन्द्रानन्द जी का संदेश सुनाते हुए कहा कि शिव केवल नाम के नहीं, अपितु काम के गुरु हैं। समाज में उनके औढरदानी स्वरुप से धन, धान्य और संतान प्राप्त करने का व्यापक प्रचलन है, तो उनके गुरु स्वरुप से ज्ञान क्यों नहीं प्राप्त किया जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि ज्ञान के अभाव में किसी भी संपत्ति का उपयोग घातक हो सकता है।
दीदी बरखा आनंद ने समझाया कि शिव जगतगुरु हैं, इसलिए जगत का कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति, संप्रदाय या लिंग का हो, उन्हें अपना गुरु बना सकता है। एक शिव शिष्य होने के लिए किसी पारंपरिक दीक्षा या औपचारिकता की आवश्यकता नहीं है। केवल यह विचार कि ‘शिव मेरे गुरु हैं’ मन में आते ही शिष्यता की शुरुआत स्वतः हो जाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने बताया कि साहब हरीन्द्रानन्द जी ने 1974 में शिव को अपना गुरु माना और 1980 के दशक तक यह अवधारणा पूरे भारत में फैल गई।
गुरु शिव से जुड़ने के तीन सरल सूत्र
कार्यक्रम में भैया अर्चित आनंद ने कहा कि शिव गुरु हैं, यह तथ्य बहुत प्राचीन है। हमारे शास्त्रों और मनीषियों ने उन्हें आदिगुरु व परमगुरु जैसी उपाधियों से विभूषित किया है। उन्होंने बताया कि शिव का शिष्य बनने के लिए किसी आडंबर या अंधविश्वास की नहीं, बल्कि केवल तीन सूत्रों की आवश्यकता है:
- पहला सूत्र: अपने गुरु शिव से मन ही मन कहें कि, ‘हे शिव, आप मेरे गुरु हैं, मैं आपका शिष्य हूँ, मुझ शिष्य पर दया कीजिये।’
- दूसरा सूत्र: सभी को यह सुनाना और समझाना है कि शिव गुरु हैं, ताकि अन्य लोग भी उन्हें अपना गुरु बना सकें।
- तीसरा सूत्र: अपने गुरु शिव को मन ही मन प्रणाम करना। इच्छा हो तो ‘नमः शिवाय’ मंत्र से भी प्रणाम कर सकते हैं।
इस आध्यात्मिक परिचर्चा में रांची से शिव कुमार विश्वकर्मा, सहरसा से परमेश्वर राय और दरभंगा के रमण प्रधान सहित कई अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।
महोत्सव में दिखा अभूतपूर्व जनसैलाब, लगा मीलों लंबा जाम
इस एक दिवसीय शिवचर्चा में श्रद्धालुओं की ऐसी अपार भीड़ उमड़ी कि कुशेश्वरस्थान से गोलमा तक गाड़ियों की मीलों लंबी कतारें लग गईं। स्थिति ऐसी हो गई कि लोगों को तेगच्छा गांव से ही अपनी गाड़ियां लगाकर पैदल ही कार्यक्रम स्थल तक पहुंचना पड़ा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कार्यक्रम के बाद पंडाल से निकलने के लिए लोगों को घंटों जाम में फंसा रहना पड़ा।
स्थानीय लोगों और पुलिस पदाधिकारियों के सहयोग से स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया, लेकिन कुशेश्वरस्थान बाजार में देर शाम तक जाम की स्थिति बनी रही। इस कार्यक्रम में न केवल जिले से, बल्कि पड़ोसी देश नेपाल से भी लोग बसें बुक कराकर शामिल हुए। इससे पहले, दीदी बरखा आनंद ने गोलमा प्रस्थान करने से पूर्व कुशेश्वरस्थान में बाबा भोलेनाथ की पूजा-अर्चना भी की। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

