

Chhapra Human Trafficking: ज़िंदगी की राहों में भटकते बचपन को जब कुछ दरिंदे अपना शिकार बनाते हैं, तब उम्मीद की किरण बनकर सामने आती हैं हमारी सतर्क एजेंसियां। छपरा जंक्शन पर ऐसा ही कुछ हुआ, जहां मानव तस्करों के जाल से 8 बच्चों को बचाया गया।
छपरा जंक्शन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और केंद्रीय खुफिया ब्यूरो (CIB) की संयुक्त कार्रवाई ने मानव तस्करी के एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पंजाब ले जाए जा रहे आठ नाबालिग बच्चों को कर्मभूमि एक्सप्रेस से सुरक्षित उतारकर एक संभावित बड़े खतरे को टाल दिया गया। यह ऑपरेशन सिर्फ बच्चों को बचाने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे काम कर रहे पूरे नेटवर्क की पोल खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
Chhapra Human Trafficking: रेलवे पुलिस की सतर्कता से टला बड़ा हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरपीएफ और सीआईबी की टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ नाबालिग बच्चों को कर्मभूमि एक्सप्रेस से तस्करी के लिए पंजाब ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही, छपरा जंक्शन पर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। ट्रेन के रुकते ही संदेह के आधार पर कुछ डिब्बों में तलाशी ली गई, जहां आठ बच्चों को दो व्यक्तियों के साथ पाया गया। पूछताछ में संतोषजनक जवाब न मिलने पर, अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई की और बच्चों को सुरक्षित अपनी निगरानी में ले लिया।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान रवि रंजन कुमार और विनोद कुमार के रूप में हुई है, जो मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले हैं। इन दोनों से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि मानव तस्करी विरोधी अभियान से जुड़े अन्य सदस्यों और गिरोह के सरगना तक पहुंचा जा सके। यह घटना बिहार में सक्रिय मानव तस्करी रैकेट की भयावहता को दर्शाती है और ऐसी वारदातों पर अंकुश लगाने के लिए निरंतर निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
बच्चों के भविष्य पर सवालिया निशान
बचाए गए बच्चों में से अधिकांश की उम्र 10 से 15 साल के बीच है। शुरुआती पूछताछ में बच्चों ने बताया कि उन्हें बहला-फुसलाकर पंजाब में काम दिलाने का लालच दिया गया था। यह एक गंभीर मामला है जहां मासूमों के भविष्य को दांव पर लगाया जाता है। बच्चों को फिलहाल बाल कल्याण समिति (CWC) के हवाले कर दिया गया है, जहां उनकी काउंसलिंग की जाएगी और उनके परिजनों से संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारियों ने बताया कि वे ऐसे मामलों में पूरी सतर्कता बरत रहे हैं और स्टेशनों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। मानव तस्करी एक जघन्य अपराध है और इसके खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। खासकर बिहार जैसे राज्यों से जहां से बच्चों को अक्सर काम के बहाने दूसरे राज्यों में ले जाकर शोषण किया जाता है, वहां ऐसे मानव तस्करी विरोधी अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह कार्रवाई आरपीएफ की तत्परता और खुफिया इनपुट पर आधारित रही, जिसने बड़े पैमाने पर होने वाली मानव तस्करी को रोका। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये बच्चे पहले भी इस गिरोह के जाल में फंसे थे या यह उनकी पहली घटना थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आगे की जांच जारी है और उम्मीद है कि इस मामले में और भी खुलासे होंगे।



