

Kishanganj Cyber Crime: आवेश आलम अररिया। जैसे-जैसे दुनिया डिजिटल हो रही है, ठगों के तरकश में भी नए-नए तीर आ गए हैं। लेकिन बिहार की पुलिस भी इन शातिरों को उन्हीं की भाषा में जवाब दे रही है, जिसका ताजा उदाहरण किशनगंज में देखने को मिला है। यहां साइबर थाना की टीम ने एक पीड़ित के खाते से उड़ाए गए पूरे 12,000 रुपये ठगों के चंगुल से वापस निकाल लिए।
मामला ऑनलाइन ट्रांजैक्शन प्लेटफॉर्म फोनपे (PhonePe) से जुड़ा हुआ है। एक व्यक्ति के साथ हुई इस साइबर धोखाधड़ी के बाद उसने बिना देरी किए इसकी शिकायत साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज कराई। शिकायत संख्या ACK No. 30512250092781 के तहत मामले को दर्ज किया गया, जिसके बाद पुलिस ने अपनी कार्रवाई शुरू की। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Kishanganj Cyber Crime टीम की त्वरित कार्रवाई
शिकायत मिलते ही किशनगंज साइबर थाना की टीम हरकत में आ गई। पुलिस ने आधुनिक तकनीक और बैंकिंग चैनलों का इस्तेमाल करते हुए उस खाते की पहचान की जिसमें ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी। टीम की तेज और सटीक कार्रवाई का ही नतीजा रहा कि जालसाजों द्वारा उड़ाए गए पूरे ₹12,000 रुपये को सफलतापूर्वक रिकवर कर लिया गया और पीड़ित के खाते में वापस भेज दिया गया। इस सफल ऑपरेशन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर समय पर शिकायत की जाए तो ठगी गई रकम वापस मिल सकती है।
इस सफलता के बाद पीड़ित ने किशनगंज पुलिस का आभार व्यक्त किया है। पुलिस की इस कार्रवाई से आम लोगों में ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर भरोसा और मजबूत हुआ है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
साइबर ठगी से कैसे बचें? पुलिस की सलाह
इस मामले के बाद किशनगंज पुलिस ने एक बार फिर आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के ऑनलाइन लेनदेन में पूरी सावधानी बरतें। पुलिस ने कहा कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, अपना ओटीपी, पिन या पासवर्ड किसी से साझा न करें और किसी भी तरह की साइबर ठगी होने पर घबराएं नहीं।
पुलिस के अनुसार, ऐसी किसी भी घटना की सूचना तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें। जितनी जल्दी आप शिकायत दर्ज कराएंगे, कार्रवाई उतनी ही प्रभावी होगी और आपके पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ही बढ़ जाएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। पुलिस का यह प्रयास लोगों को जागरूक करने और साइबर अपराधियों के मंसूबों को नाकाम करने में एक महत्वपूर्ण कदम है।




