
Jamui News: जब किसी अफसर का तबादला होने के सालों बाद भी जनता उसे पलकों पर बिठाए, तो समझिए काम बोलता है। कुछ ऐसी ही कहानी है जमुई के पूर्व एसपी और सीआईडी के डीआईजी जयंतकांत की, जो अपनी पत्नी डॉ. स्मृति पासवान के साथ एक बार फिर जमुई की धरती पर पधार रहे हैं। जानकारी के अनुसार, यह दंपती 1 फरवरी को जिले में आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत करेगा।
Jamui News: जब एसपी जयंतकांत ने बदल दी जिले की तस्वीर
जयंतकांत का जमुई से एक गहरा और पारिवारिक नाता रहा है। साल 2015 से 2017 तक अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने पुलिस अधीक्षक के रूप में जो उपलब्धियां हासिल कीं, उन्हें आज भी याद किया जाता है। यह वही दौर था जब उन्होंने नक्सलियों के खिलाफ एक बड़ी मुहिम छेड़ी और उनकी कमर तोड़कर रख दी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनके कड़े एक्शन का ही नतीजा था कि या तो नक्सलियों ने जिला छोड़ दिया या फिर मुख्यधारा में लौट आए। आज जमुई को एक नक्सल और अपराध मुक्त जिले के रूप में जाना जाता है तो इसका बड़ा श्रेय जयंतकांत के नेतृत्व में बिहार पुलिस की कार्रवाई को दिया जाता है।
दंगों की आग बुझाने मैदान में उतरीं थीं डॉ. स्मृति पासवान
एक तरफ जहां जयंतकांत अपनी कड़क छवि के लिए जाने जाते हैं, वहीं उनकी धर्मपत्नी डॉ. स्मृति पासवान समाजसेवा का एक बड़ा चेहरा हैं। जमुई के लोग 2017 के उस दौर को नहीं भूले हैं जब जिला सांप्रदायिक दंगों की आग में जल रहा था। उस मुश्किल घड़ी में डॉ. स्मृति ने घर की दहलीज लांघकर सड़कों पर मोर्चा संभाला। उन्होंने महिला समूहों और अन्य शुभचिंतकों के साथ मिलकर शांति बहाली में अहम भूमिका निभाई, जिससे जलते हुए जमुई को अमन-चैन की ठंडक मिली। उनके इस कदम के लिए आज भी हिंदू-मुस्लिम समेत हर वर्ग के लोग उन्हें अपना मार्गदर्शक मानते हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह दंपती मानवता की एक मिसाल है और यही वजह है कि जमुई की लगभग 20 लाख की आबादी आज भी उनके प्रति असीम श्रद्धा रखती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनके आगमन की खबर से जिले के लोगों में उत्साह है और वे पलकें बिछाए उनका इंतजार कर रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





