

Dalit Atrocities: मिथिलांचल की धरती पर इंसाफ का सूरज मानो बादलों में छिप गया है, जहां कानून की रौशनी की जगह दबंगों का अँधेरा पसरता जा रहा है। दरभंगा में एक के बाद एक हुई घटनाओं ने सुशासन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां दलितों पर हमले की तीन अलग-अलग घटनाओं ने इलाके में सनसनी फैला दी है। भाकपा (माले) ने इन मामलों को लेकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
भाकपा (माले) के जिला सचिव बैद्यनाथ यादव ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि एक तरफ सरकार पूरे बिहार में कानून का खौफ दिखाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर मिथिलांचल में दलितों और गरीबों पर हमले तेज हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अपराधियों का मनोबल इस कदर बढ़ गया है कि कहीं मजदूरी मांगने पर पीट-पीटकर अधमरा कर दिया जाता है, तो कहीं अपने ही घर में रहने पर गोलियां बरसाई जाती हैं। इन घटनाओं की जानकारी लेने के लिए भाकपा (माले) की सात सदस्यीय जांच टीम दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (DMCH) में इलाजरत पीड़ितों से मिलने पहुंची।
Dalit Atrocities: जब मजदूरी बनी जान की दुश्मन
पहला मामला कुशेश्वरस्थान के हरिनगर गांव का है, जहां बकाया मजदूरी मांगना दलित परिवारों के लिए जानलेवा साबित हुआ। दबंगों ने दर्जनों दलित मजदूरों और उनके परिवार वालों पर जानलेवा हमला कर उन्हें बुरी तरह घायल कर दिया। सभी घायलों का इलाज डीएमसीएच में चल रहा है, लेकिन पीड़ितों का आरोप है कि घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी हमलावरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। माले ने आरोप लगाया कि हमलावरों को भाजपा-जदयू सरकार का खुला संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण पुलिस भी हाथ पर हाथ धरे बैठी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
वहीं, दूसरी घटना सदर प्रखंड के धोई गांव की है, जहां भाकपा (माले) के नेता डोमू राम पर जानलेवा हमला किया गया और गोली भी चलाई गई। डोमू राम कई वर्षों से सरकारी जमीन पर घर बनाकर रह रहे थे और प्रशासन से जमीन का मालिकाना हक और सुरक्षा की गुहार लगा रहे थे। कुछ दिन पहले दबंगों ने उनके घर को उजाड़ दिया था, जिसका मामला सदर थाने में (कांड संख्या 147/25) दर्ज है। उन पर लगातार केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा था, और जब उन्होंने इससे इनकार किया, तो उन पर हमला कर दिया गया। फिलहाल वह भी डीएमसीएच में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।
ट्रेन ड्राइवर से लेकर पार्टी नेता तक, निशाने पर कौन?
दलितों पर हमले की तीसरी घटना लौकही में सामने आई, जहां एक दलित ट्रेन ड्राइवर की सरेआम पिटाई कर दी गई। इन सिलसिलेवार घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर अपराधियों के निशाने पर कौन है। बढ़ते बिहार क्राइम को लेकर लोगों में आक्रोश है। भाकपा (माले) ने इन तीनों घटनाओं के दोषियों की अविलंब गिरफ्तारी की मांग की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। बैद्यनाथ यादव ने स्पष्ट किया कि डोमू राम पर हमला करने वाले और हरिनगर में दलित परिवारों को पीटने वाले अपराधियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित परिवारों को कानूनी सुरक्षा प्रदान की जाए।
पार्टी ने ऐलान किया है कि दलितों और गरीबों पर बढ़ते हमलों के खिलाफ जल्द ही एक ‘न्याय सम्मेलन’ का आयोजन किया जाएगा ताकि पीड़ितों को न्याय दिलाया जा सके। डीएमसीएच पहुंची जांच टीम में माले के राज्य कमेटी सदस्य अभिषेक कुमार, इंसाफ मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष नेयाज अहमद, रंजीत राम, अशोक पासवान, ऐपवा जिला सचिव शनिचरी देवी, पप्पू खान और पप्पू पासवान शामिल थे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

