Budget: 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जब देश का बजट पेश किया, तो आम जनता की उम्मीदों पर जैसे पानी फिर गया। मध्यवर्ग से लेकर किसानों और चुनावी राज्यों के करोड़ों मतदाताओं तक को इस बजट से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन परिणाम ने सबको चौंका दिया। यह बजट सिर्फ निराशा ही लेकर नहीं आया, बल्कि इसने उन प्रमुख मुद्दों को भी दरकिनार कर दिया, जिन पर जनता की नजरें टिकी हुई थीं। आइए गहराई से जानते हैं, वे कौन सी पांच उम्मीदें थीं जिन्हें इस बजट में तोड़ दिया गया।
बजट 2026: पांच बड़े झटके जिन्होंने तोड़ दीं आम आदमी की उम्मीदें
बजट में आयकर छूट की उम्मीदें
पिछले बजट में वित्त मंत्री ने आयकर में एक बड़ी राहत दी थी, जिससे आयकर की सीमा 12 लाख रुपये तक पहुंच गई थी। इसी को देखते हुए इस बार भी यही उम्मीद थी कि वित्त मंत्री कुछ और टैक्स राहत देंगी और यह सीमा 13 या 14 लाख रुपये तक बढ़ाई जाएगी। हालांकि, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। आयकर पर कोई चर्चा भी नहीं हुई, और परिणामस्वरूप करदाता वर्ग को गहरी निराशा हाथ लगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उम्मीद यह भी थी कि न्यू टैक्स रिजीम में कुछ बदलाव आएंगे जिससे आम आदमी को टैक्स में कुछ छूट मिल सकेगी। पीपीएफ, एनपीएस या ईएलएसएस जैसे निवेश विकल्पों में छूट की आस लगाए बैठे लोगों को भी मायूसी मिली, क्योंकि वित्त मंत्री ने इस संबंध में कोई बात नहीं की।
किसानों और युवाओं के लिए अनसुनी मांगें
किसानों को उम्मीद थी कि बजट में उनके लिए कोई नई योजना लाई जाएगी। नई योजना न सही, तो कम से कम कुछ अन्य फसलों को एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) के दायरे में लाने की बात तो होगी। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली राशि में बढ़ोतरी की भी उम्मीद थी, क्योंकि पिछले छह सालों से इस राशि में कोई बदलाव नहीं हुआ है। खाद-बीज पर सब्सिडी, कम ब्याज पर कर्ज और पुरानी कर्ज माफी की भी किसानों को आस थी, लेकिन इन सभी उम्मीदों पर कोई खास घोषणा नहीं हुई।
युवाओं को रोजगार के लिए विशेष योजनाओं की उम्मीद थी। हालांकि, बजट में सीधे तौर पर कोई ‘स्पेशल स्कीम’ लॉन्च नहीं की गई। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से रोजगार सृजन, डेटा सेंटर के जरिए रोजगार बढ़ाने, स्कूलों में कंटेंट क्रिएशन, कुछ इंटर्नशिप और कौशल विकास की बातें जरूर हुईं, लेकिन ऐसी कोई ठोस योजना सामने नहीं आई जो सीधे तौर पर मौजूदा बेरोजगार युवाओं को तत्काल रोजगार के लिए प्रेरित कर सके।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वरिष्ठ नागरिकों को भी इस बजट से काफी आशाएं थीं। उन्हें उम्मीद थी कि कोई नई बीमा योजना आएगी या रेलवे टिकट में मिलने वाली रियायतें बहाल होंगी। हालांकि, ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई। वरिष्ठ नागरिकों के लिए टीडीएस कटौती की सीमा भी अपरिवर्तित रही, जिससे उन्हें कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिला।
चुनावी राज्यों की अनदेखी
पांच राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए, उन राज्यों के लोगों को इस बजट से बड़ी सौगात मिलने की उम्मीद थी। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के लोग विशेष रूप से आशान्वित थे, जबकि असम, केरल और पुडुचेरी को भी विशेष पैकेज, प्रोत्साहन या किसी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) योजना की उम्मीद थी। हालांकि, अलग से ऐसी कोई बड़ी घोषणा नहीं हुई। रेलवे कॉरिडोर के तहत सिलीगुड़ी को लाभ मिला है। बंगाल के डांकुनी से गुजरात के सूरत तक एक नया फ्रेट कॉरिडोर बनाने की घोषणा की गई है। तमिलनाडु उन चार राज्यों में शामिल है जहां ‘रेयर अर्थ कॉरिडोर’ विकसित किया जाएगा। नारियल, काजू और कोको उत्पादकों के लिए विशेष योजनाएं शुरू की गई हैं, जिसका सीधा लाभ तमिलनाडु के तटीय जिलों को मिलेगा। हालांकि, बिहार जैसे राज्यों के लिए पूर्व में देखने को मिलीं विशेष योजनाओं जैसी कोई बड़ी घोषणा इन चुनावी राज्यों के लिए नहीं की गई, जिससे वहां के मतदाताओं में भी निराशा है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें: आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।







