
Bihar Politics: बिहार की सियासत में कब क्या हो जाए, कहना मुश्किल है। अक्सर विरोधाभास की धुरी पर घूमती यहां की राजनीति में एक ऐसा ही अनूठा पल तब आया जब धुर-विरोधी माने जाने वाले दो दिग्गजों को एक साथ ठहाके लगाते देखा गया। यह नजारा बिहार विधानसभा के संयुक्त सत्र के दौरान देखने को मिला।
बिहार पॉलिटिक्स: क्यों अहम है यह मुलाकात?
विधानमंडल के संयुक्त सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बीच हुई यह अनापेक्षित बातचीत राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। दोनों नेताओं का एक साथ खुलकर बातें करना और हंसना कई अटकलों को जन्म दे रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सूत्रों के अनुसार, यह मुलाकात सदन के गलियारे में हुई जब दोनों नेता एक-दूसरे के पास से गुजर रहे थे। सामान्य शिष्टाचार के तहत हुई इस बातचीत में कुछ देर तक दोनों मुस्कुराते और हल्के-फुल्के अंदाज में बात करते देखे गए। इस दौरान सदन के अन्य सदस्य भी मौजूद थे और उन्होंने भी इस दृश्य को हैरत भरी निगाहों से देखा।
हालांकि अभिभाषण के दौरान सीएम नीतीश और तेजस्वी यादव के बीच कई तरीकों से संवाद हुए।पहले इशारों में बातचीत हुई। फिर दोनों ने एक दूसरे से कुछ कहा, जिसके बाद तेजस्वी ने सीएम नीतीश को कुछ कहा जिसे सुन ना सिर्फ नीतीश बल्कि अगल-बगल में मौजूद सभी मंत्री सदस्य भी ठहाके लगाने लगे।
सदन में राज्यपाल का अभिभाषण चल रहा था, इस दौरान राज्यपाल महिलाओं के लिए सरकार के द्वारा चलाए जा रहे योजनाओं की जानकारी दे रहे थे। तभी विपक्ष के सदस्यों ने हंगामा शुरु कर दिया। विपक्ष आरोप लगाने लगे कि जमीनी तौर पर ऐसा कुछ नहीं है। जिसके बाद सीएम नीतीश ने तेजस्वी से इशारों में पूछा कि सब क्यों शोर रहे हैं..रोको इन्हें..।
सीएम नीतीश के इस सवाल पर तेजस्वी जवाब देते हुए कुछ कहा, तेजस्वी हाथों से कुछ इशारा करते हुए भी कहा। ऐसा माना जा रहा कि तेजस्वी ने कहा कि सही ही तो कह रहे हैं। जिसके बाद सीएम नीतीश ने कहा कि, ठीक है जो करना है करो। सीएम नीतीश के इतना कहते ही तेजस्वी सहित पक्ष-विपक्ष के नेता ठहाके लगाने लगे।
राजभवन के गलियारे में दिखी तस्वीर
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब राज्य में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। बिहार विधानसभा सत्र के दौरान इस तरह की दो बड़े नेताओं की व्यक्तिगत बातचीत अक्सर गहरे राजनीतिक निहितार्थ रखती है। हालांकि, दोनों ही दलों ने इसे महज एक सामान्य मुलाकात बताया है, लेकिन अंदरखाने यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ एक संयोग था या इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक चाल छिपी है।
राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को विभिन्न दृष्टिकोणों से देख रहे हैं। कुछ इसे सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात मानते हैं, जबकि कुछ अन्य इसे भविष्य की राजनीति के संकेत के रूप में देख रहे हैं। बिहार की राजनीति में ऐसे मौके पहले भी आए हैं जब तात्कालिक विरोध के बावजूद बड़े नेताओं ने सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
सदन के अंदर और बाहर दोनों जगह इस बातचीत पर बहस जारी है। जहां कुछ लोग इसे स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी बता रहे हैं, वहीं कुछ अन्य इसे आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों से जोड़कर देख रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुलाकात का बिहार की राजनीति पर क्या दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है।
क्या यह भविष्य का संकेत है?
तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार के बीच पूर्व में भी कई बार ऐसे ही अनौपचारिक मुलाकातें हुई हैं, जो बाद में बड़े राजनीतिक बदलावों का कारण बनी हैं। इसलिए, इस बार भी यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह मुलाकात बिहार के राजनीतिक भविष्य की कोई नई इबारत लिखती है। यह ध्यान रखना होगा कि बिहार की राजनीति अप्रत्याशित मोड़ों के लिए जानी जाती है, और ऐसे में किसी भी मुलाकात को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



