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फ़रवरी, 14, 2026
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माता सीता का जन्मोत्सव: Janaki Jayanti 2026 कब है?

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Janaki Jayanti 2026: भारतीय संस्कृति में देवी-देवताओं के जन्मोत्सव का विशेष महत्व है, और इन्हीं पावन पर्वों में से एक है जानकी जयंती, जो माता सीता के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। यह दिन भक्तों के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

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माता सीता का जन्मोत्सव: Janaki Jayanti 2026 कब है?

Janaki Jayanti 2026: शुभ तिथि और पूजा का महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जानकी जयंती का पावन पर्व वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। Janaki Jayanti 2026 में, यह शुभ तिथि 12 मई, दिन मंगलवार को पड़ रही है। इस दिन भक्तगण प्रभु श्री राम और माता जानकी की विशेष आराधना कर उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं। यह माना जाता है कि जो भक्त श्रद्धापूर्वक इस दिन व्रत रखते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं, उन्हें सुख-समृद्धि, अखंड सौभाग्य तथा जीवन में शांति की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन के धार्मिक महत्व का वर्णन विभिन्न पुराणों में मिलता है, जहां माता सीता को शक्ति और त्याग की देवी के रूप में पूजा जाता है।

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जानकी जयंती 2026: पूजा विधि

यह पर्व अत्यंत पवित्रता और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। माता सीता और भगवान राम की कृपा पाने के लिए निम्नलिखित विधि से पूजा करें:

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  • प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें और माता सीता तथा भगवान राम की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • व्रत का संकल्प लें।
  • माता सीता को पीले वस्त्र, सिंदूर, कुमकुम, अक्षत, धूप, दीप, फूल, फल और नैवेद्य अर्पित करें।
  • भगवान राम की भी विधिवत पूजा करें।
  • जानकी स्तोत्र या रामचरितमानस का पाठ करें।
  • माता सीता के मंत्रों का जाप करें।
  • पूजा के अंत में आरती करें और प्रसाद वितरण करें।
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जानकी जयंती 2026: शुभ मुहूर्त

तिथिदिनप्रारंभ (समय)समाप्त (समय)
12 मई 2026मंगलवारप्रातः 05:30अगले दिन 03:00

माता सीता के प्राकट्य की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार मिथिला में भयंकर अकाल पड़ा था। राजा जनक ने ऋषियों की सलाह पर यज्ञ भूमि को हल से जोतने का निर्णय लिया। जब राजा जनक हल चला रहे थे, तब एक स्वर्ण पेटी में उन्हें एक सुंदर कन्या मिली। राजा जनक ने उस कन्या को अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया और उसका नाम सीता रखा, क्योंकि वह हल की सीत (रेखा) से प्राप्त हुई थी। यह दिवस ही जानकी जयंती के रूप में मनाया जाता है। माता सीता को भूदेवी की पुत्री और लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। इस दिन व्रत रखने का महत्व बहुत अधिक है और माना जाता है कि इससे सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

जानकी जयंती मंत्र

श्री जानकी रामाभ्यां नमः।

या

ॐ श्री सीतायै नमः।

निष्कर्ष और उपाय

जानकी जयंती का पर्व हमें माता सीता के त्याग, सहनशीलता और निस्वार्थ प्रेम की याद दिलाता है। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है, संतान सुख की प्राप्ति होती है और सभी कष्ट दूर होते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जो भक्त इस दिन माता सीता और भगवान राम की सच्चे मन से आराधना करते हैं, उनके घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।
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