



February Vrat Tyohar: हिन्दू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास का आगमन हो चुका है, जो आध्यात्मिक साधना और व्रत-त्योहारों से परिपूर्ण होता है। यह महीना भगवान शिव, श्री हरि विष्णु और अन्य देवी-देवताओं की भक्ति के लिए विशेष महत्व रखता है।
फरवरी व्रत त्योहार: फाल्गुन मास के प्रमुख पर्व और उनकी महिमा
फरवरी व्रत त्योहार: मुख्य पर्वों का विवरण
हिन्दू धर्म में प्रत्येक मास अपने आप में विशेष महत्व रखता है, और फरवरी का महीना भी अनेक पवित्र व्रत-त्योहारों को समेटे हुए है। इस माह संकष्टी चतुर्थी से लेकर महाशिवरात्रि, विजया एकादशी, प्रदोष व्रत, आमलकी एकादशी, फाल्गुन पूर्णिमा और होलिका दहन जैसे कई प्रमुख पर्व पड़ रहे हैं। इन सभी पर्वों का अपना विशिष्ट महत्व और पूजा विधि है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इन पावन अवसरों पर विधि-विधान से पूजन करने और शुभ फल प्राप्त करने के लिए सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और पारण समय जानना अत्यंत आवश्यक है। यह महीना भगवान शिव की आराधना, विष्णु पूजन और प्रकृति के साथ जुड़ाव का प्रतीक है।
इस पवित्र मास में पड़ने वाले प्रमुख व्रत-त्योहारों की सूची इस प्रकार है, जिनके सही तिथि और शुभ मुहूर्त की जानकारी आपको आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाएगी:
- संकष्टी चतुर्थी: भगवान गणेश को समर्पित यह व्रत कष्टों को दूर करने वाला माना जाता है। भक्त इस दिन गणेश जी की पूजा-अर्चना कर मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।
- विजया एकादशी: यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसके व्रत से समस्त कार्यों में विजय प्राप्त होती है। इस दिन भगवान विष्णु का स्मरण और पूजन अत्यंत फलदायी होता है।
- महाशिवरात्रि: हिन्दू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक महाशिवरात्रि भगवान शिव और देवी पार्वती के विवाह का प्रतीक है। इस दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक, बेलपत्र, धतूरा आदि अर्पित कर महादेव का पूजन किया जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
- प्रदोष व्रत: यह व्रत भी भगवान शिव को समर्पित है और माह में दो बार आता है। त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष काल में शिव पूजन करने से सभी दोषों का निवारण होता है।
- आमलकी एकादशी: फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहते हैं। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा और भगवान विष्णु का पूजन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- फाल्गुन पूर्णिमा: यह पूर्णिमा होलिका दहन से ठीक पहले आती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान का विशेष महत्व होता है।
- होलिका दहन: बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक यह पर्व होलिका को जलाने की परंपरा से जुड़ा है। इसके अगले दिन रंगों का त्योहार होली मनाया जाता है।
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इन सभी व्रत-त्योहारों का पालन श्रद्धा और भक्तिभाव से करने पर व्यक्ति को सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है। प्रत्येक पर्व का अपना एक विशिष्ट महत्व है, जो हमें धर्म के मार्ग पर चलने और सद्कर्म करने की प्रेरणा देता है। फरवरी माह में पड़ने वाले ये सभी पर्व हमें प्रकृति से जुड़ने और दिव्य ऊर्जा का अनुभव करने का अवसर प्रदान करते हैं। अपने इष्ट देव की आराधना कर इन दिनों का पूर्ण लाभ उठाएं और जीवन को सफल बनाएं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।






