
Character Certificate: नौकरशाही की फांस और हर छह महीने पर थाने-कचहरी के चक्कर काटने की मजबूरी, यह कहानी है कहलगांव NTPC में काम करने वाले उन हजारों कर्मचारियों की, जिनके लिए एक अनिवार्य नियम अब मानसिक प्रताड़ना का सबब बन चुका है।
कहलगांव। राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (NTPC) में कार्यरत कर्मियों के लिए हर छह महीने में Character Certificate जमा करने की अनिवार्यता का मामला अब बिहार विधानसभा तक पहुंच गया है। कहलगांव के विधायक ने सदन में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए सरकार का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकृष्ट कराया है, जिससे वर्षों से संस्थान में सेवा दे रहे कर्मचारियों को जूझना पड़ रहा है।
विधायक ने सदन में कहा कि जो कर्मचारी दशकों से एक प्रतिष्ठित सार्वजनिक उपक्रम में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उनसे हर छह महीने में प्रमाण पत्र मांगना पूरी तरह से अव्यावहारिक है। इस प्रक्रिया के लिए कर्मचारियों को बार-बार थाना, अंचल कार्यालय और अन्य प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसमें न केवल उनका कीमती समय और पैसा बर्बाद होता है, बल्कि यह एक अनावश्यक मानसिक बोझ भी डालता है। इस तरह के चरित्र सत्यापन की छोटी अवधि का कोई ठोस औचित्य समझ नहीं आता।
NTPC कर्मियों के लिए क्यों बना Character Certificate सिरदर्द?
विधानसभा में विधायक द्वारा उठाए गए इस सवाल ने NTPC कर्मियों की लंबे समय से चली आ रही पीड़ा को आवाज दी है। उन्होंने तर्क दिया कि जब एक कर्मचारी संस्थान में स्थायी रूप से कार्यरत है, तो उसके चरित्र का पुन: सत्यापन इतनी कम अवधि में क्यों जरूरी है? यह नियम उन कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से कठिन है जो संयंत्र के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं और जिन्हें इन औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए कई किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है।
इस मुद्दे पर सदन में मौजूद अन्य सदस्यों ने भी अपनी सहमति जताई और इसे एक जायज मांग करार दिया। कर्मचारियों की मांग है कि इस नियम की तत्काल समीक्षा की जाए। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। सरकार को या तो चरित्र प्रमाण पत्र की वैधता की अवधि को बढ़ाना चाहिए, या फिर कोई ऐसा स्थायी समाधान निकालना चाहिए जिससे कर्मचारियों को इस बेवजह की परेशानी से मुक्ति मिल सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सदन में गूंजा मुद्दा, सरकार से समाधान की मांग
विधायक ने सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों से जुड़ा एक संवेदनशील विषय है। बार-बार की इस प्रक्रिया से कर्मचारियों के मनोबल पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। उम्मीद जताई जा रही है कि विधानसभा में मुद्दा उठने के बाद सरकार इस पर गंभीरता से विचार करेगी और जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय लेगी, जिससे NTPC में कार्यरत हजारों कर्मचारियों को राहत मिल सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।






