
India-US Trade Deal:
भारत और अमेरिका के बीच जिस बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते का इंतजार लंबे समय से किया जा रहा था, उस पर आखिरकार मुहर लग गई है। यह डील न केवल रणनीतिक ऊर्जा खरीद को बढ़ावा देगी, जिसमें वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात भी शामिल है, बल्कि इसमें भारतीय किसानों के हितों की पूरी तरह से रक्षा का भी प्रावधान किया गया है। लेकिन क्या वाकई यह समझौता भारत के विशाल कृषि क्षेत्र के लिए एक गेम चेंजर साबित होगा या इसमें छिपी हैं कुछ चुनौतियां, आइए जानते हैं।
भारत-अमेरिका इंडिया-US Trade Deal: किसानों के लिए क्या है खास, जानिए पूरी कहानी
सूत्रों के मुताबिक, इस समझौते में कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को जानबूझकर बाहर रखा गया है। यह सुनिश्चित किया गया है कि भले ही भारत अमेरिकी बाजार तक अपनी पहुंच बढ़ाने का प्रयास कर रहा हो, लेकिन कृषि और डेयरी जैसे नाजुक सेक्टर्स पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि करोड़ों भारतीय किसानों और पशुपालकों को सस्ते विदेशी आयात के हानिकारक प्रभावों से बचाया जा सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अमेरिका में खेती मुख्य रूप से मशीनीकृत और बड़े पैमाने पर होती है, जबकि भारत में छोटे किसान और गैर-मशीनीकृत डेयरी प्रणालियाँ प्रचलित हैं। ऐसे में, यदि सस्ते अमेरिकी उत्पाद भारतीय बाजारों में आते, तो स्थानीय किसानों के लिए उनसे मुकाबला करना असंभव हो जाता, जिससे उनकी आजीविका पर गंभीर संकट पैदा हो सकता था। इस समझौते के तहत, भारतीय सामानों के आयात पर लगने वाले टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा।
इंडिया-US Trade Deal और किसानों के हित
हमारे देश में कृषि क्षेत्र लगभग 45 प्रतिशत लोगों को रोजगार प्रदान करता है, और भारत का डेयरी सेक्टर भी मुख्य रूप से छोटे और सीमांत किसानों पर निर्भर है, जिनके पास मुश्किल से एक या दो गाय या भैंस होती हैं। इसके विपरीत, अमेरिका, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में बड़े कॉर्पोरेट फार्म और विशाल डेयरी उद्योग हैं, जो अपने किसानों को भारी सब्सिडी भी देते हैं।
अगर भारत इस ट्रेड डील के तहत इन संवेदनशील कृषि क्षेत्रों से टैरिफ हटा देता, तो भारतीय बाजार सस्ते विदेशी उत्पादों से भर जाते, जिससे देश के किसानों को सालाना लगभग 1.03 करोड़ रुपये का भारी नुकसान होता। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, हालिया भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में संवेदनशील कृषि उत्पादों और डेयरी को पूरी तरह से सुरक्षित रखा गया है, ताकि भारतीय किसानों के हितों से कोई समझौता न हो।
भारतीय कृषि क्षेत्र का संरक्षण
यह समझौता भारत की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि वह अपने विशाल कृषि क्षेत्र की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। विदेशी आयात की बाढ़ से छोटे किसानों और पशुपालकों की आजीविका को बचाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह सुनिश्चित करता है कि भारतीय किसान अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में भी अपनी पहचान बनाए रख सकें।
यह डील भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ एक संतुलित व्यापार नीति का भी उदाहरण है, जहां वैश्विक व्यापार के लाभों को स्वीकार करते हुए घरेलू हितों का भी पूरा ध्यान रखा गया है। यह समझौता दिखाता है कि आर्थिक विकास और सामाजिक सुरक्षा साथ-साथ चल सकते हैं। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


