



Sankashti Chaturthi 2026: सनातन धर्म में चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व है, और जब यह संकष्टी चतुर्थी होती है, तब भगवान गणेश की कृपा पाने का यह दिन अत्यंत पावन माना जाता है। इस बार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को ‘द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी’ के रूप में मनाया जाएगा, जो कि 5 फरवरी 2026, गुरुवार को पड़ रही है। इस शुभ अवसर पर गणपति बप्पा की आराधना से भक्तों के जीवन के समस्त संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
# Sankashti Chaturthi 2026: द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026: जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का सही समय
## Sankashti Chaturthi 2026 का महत्व और व्रत विधि
फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश को समर्पित द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से गणेश पूजा करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन व्रत रखने वाले भक्त पूरे श्रद्धा भाव से गणपति का स्मरण करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करते हैं। इस व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली हर समस्या का समाधान होता है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें
### द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि
* सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
* घर के ईशान कोण में भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
* गणपति को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से स्नान कराएं।
* उन्हें लाल वस्त्र, चंदन, सिंदूर, अक्षत (साबुत चावल), दूर्वा (हरी घास), शमी पत्र और विभिन्न प्रकार के सुगंधित फूल अर्पित करें।
* मोदक या लड्डू का भोग लगाएं, क्योंकि यह भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय है।
* धूप-दीप जलाकर भगवान गणेश की आरती करें और उनके विभिन्न नामों का जाप करें।
* संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करें, जिससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
* पूरे दिन निराहार रहकर व्रत का पालन करें।
* शाम को चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य दें और व्रत का पारण करें।
### द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026: शुभ मुहूर्त
| विवरण | समय (5 फरवरी 2026, गुरुवार) |
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| चतुर्थी तिथि प्रारंभ | 04 फरवरी 2026, शाम 07:15 बजे |
| चतुर्थी तिथि समाप्त | 05 फरवरी 2026, शाम 04:30 बजे |
| चंद्रोदय समय | 05 फरवरी 2026, रात 09:20 बजे |
### संकष्टी चतुर्थी का पौराणिक महत्व
भगवान गणेश बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के दाता माने जाते हैं। संकष्टी चतुर्थी पर व्रत रखने और गणेश पूजा करने से विघ्नहर्ता भक्तों के सभी कष्टों को हर लेते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार सभी देवी-देवता किसी समस्या से घिरे थे, तब भगवान शिव ने अपने पुत्रों से इसका समाधान खोजने को कहा। कार्तिकेय अपने वाहन पर बैठकर ब्रह्मांड का चक्कर लगाने निकल पड़े, लेकिन गणेश जी ने माता-पिता (शिव-पार्वती) की परिक्रमा कर यह सिद्ध किया कि माता-पिता ही समस्त संसार हैं। इससे प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें सभी देवताओं में प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया और कहा कि किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी की पूजा करने से वह कार्य निर्विघ्न संपन्न होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
### भगवान गणेश के मंत्र
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
ॐ गं गणपतये नमः॥
### निष्कर्ष और उपाय
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का यह पावन दिन भगवान गणेश की असीम कृपा प्राप्त करने का अनुपम अवसर है। इस दिन सच्चे मन से की गई आराधना और व्रत से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और सुख-शांति का वास होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। व्रत के पारण के बाद गरीबों को अपनी सामर्थ्य अनुसार अन्न, वस्त्र या दक्षिणा दान अवश्य करें। ऐसा करने से भगवान गणेश और माता लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होती है।






