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हिमांशु गुप्ता की IAS बनने की प्रेरणादायक यात्रा: चाय बेचकर कैसे हासिल की सिविल सेवा परीक्षा (UPSC) में 139वीं रैंक

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UPSC: उत्तराखंड के सितारगंज के चाय विक्रेता के बेटे हिमांशु गुप्ता ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से वह मुकाम हासिल किया है जो लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने साबित कर दिया कि सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए केवल मजबूत इरादों की आवश्यकता होती है।

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हिमांशु गुप्ता की IAS बनने की प्रेरणादायक यात्रा: चाय बेचकर कैसे हासिल की सिविल सेवा परीक्षा (UPSC) में 139वीं रैंक

बचपन की चुनौतियाँ और पढ़ाई के प्रति लगन

उत्तराखंड के सितारगंज से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु गुप्ता का बचपन अभावों में गुजरा। उनके पिता सड़क किनारे चाय की दुकान चलाते थे, जिससे परिवार का भरण-पोषण होता था। आर्थिक तंगी के बावजूद, उनके माता-पिता ने हिमांशु की पढ़ाई को हमेशा प्राथमिकता दी, और यही सोच उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बनी।

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हिमांशु का बचपन चुनौतियों से भरा रहा। स्कूल पहुंचने के लिए उन्हें रोज़ाना कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था, चाहे मौसम कैसा भी हो। हालांकि, पढ़ाई के प्रति उनका जूनून कभी कम नहीं हुआ। हिमांशु अपनी लगन और कुशाग्र बुद्धि के लिए जाने जाते थे, और उन्होंने हमेशा बड़े सपने देखे तथा कभी हार नहीं मानी।

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उच्च शिक्षा और UPSC परीक्षा की चुनौती

अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, हिमांशु ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और फिर जेएनयू से परास्नातक किया। इसी अवधि में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी का दृढ़ संकल्प लिया। उल्लेखनीय है कि उन्होंने कभी किसी महंगी कोचिंग का सहारा नहीं लिया, बल्कि अपनी तैयारी मुख्य रूप से सेल्फ-स्टडी के माध्यम से की। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में वर्षों की अथक मेहनत, अदम्य धैर्य और निरंतर अभ्यास की आवश्यकता होती है। हिमांशु ने अपने पहले ही प्रयास में वर्ष 2018 में यह परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की और उनका चयन भारतीय रेलवे यातायात सेवा (IRTS) में हो गया। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी, लेकिन उनके मन में IAS बनने का बड़ा लक्ष्य था।

पहले प्रयास में IRTS, फिर IPS में चयन

अपने सपने को पूरा करने के लिए, हिमांशु ने दूसरा प्रयास किया और वर्ष 2019 में उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में हुआ। यह भी एक बड़ी सफलता थी, परंतु उनका अंतिम लक्ष्य IAS ही था। इसी ध्येय के साथ, उन्होंने तीसरे प्रयास के लिए पूरी लगन और समर्पण से तैयारी की। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

IAS बनने का सपना और अथक संघर्ष

आखिरकार, वर्ष 2020 में हिमांशु ने सिविल सेवा परीक्षा में अखिल भारतीय रैंक 139 हासिल की और उनका IAS बनने का सपना साकार हुआ। उनकी यह सफलता की कहानी न केवल उनके परिवार के लिए गौरव का विषय बनी, बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। हिमांशु की यह प्रेरणादायक यात्रा युवाओं को यह सीख देती है कि सफलता केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि सच्ची लगन और सही दिशा में किए गए प्रयासों से मिलती है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि यदि कोई व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार और अथक परिश्रमी हो, तो जीवन की चुनौतियां भी उसके रास्ते में बाधा नहीं बन सकतीं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें: लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें।

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