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फ़रवरी, 13, 2026
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Maha Shivratri 2026: पहाड़ी मंदिर से निकलेगी भव्य शिव बारात, कानपुर की झांकियां बनेंगी आकर्षण का केंद्र

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Maha Shivratri 2026: शिव और शक्ति के मिलन का महापर्व महाशिवरात्रि, सृष्टि के कल्याण का संदेश लेकर आता है। यह वह पावन तिथि है जब भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, और इसी रात्रि को भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया था। इस विशेष पर्व पर भक्तगण शिव मंदिरों में उमड़ पड़ते हैं और भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए विविध अनुष्ठान करते हैं। इस वर्ष, महाशिवरात्रि 2026 के अवसर पर, पहाड़ी मंदिर से एक अत्यंत भव्य शिव बारात निकाली जाएगी, जो भक्तों के लिए असीम श्रद्धा और उत्साह का प्रतीक बनेगी। कानपुर से आने वाली आकर्षक झांकियां इस बारात में चार चांद लगाएंगी और श्रद्धालुओं के लिए आस्था एवं आकर्षण का प्रमुख केंद्र होंगी। यह केवल एक शोभायात्रा नहीं, अपितु महादेव की महिमा का गुणगान है, जिसमें हर भक्त स्वयं को लीन पाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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Maha Shivratri 2026: पहाड़ी मंदिर से निकलेगी भव्य शिव बारात, कानपुर की झांकियां बनेंगी आकर्षण का केंद्र

Maha Shivratri 2026 का पावन अवसर और शिव बारात का अलौकिक दृश्य

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर महादेव की कृपा प्राप्त करने के लिए भक्तजन विभिन्न प्रकार के अनुष्ठान करते हैं। इस दिन विशेष शुभ मुहूर्त में की गई पूजा-अर्चना अत्यंत फलदायी मानी जाती है। शिव बारात का आयोजन भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो भगवान शिव के वैरागी और गृहस्थ दोनों स्वरूपों का प्रतीक है। कानपुर की आकर्षक झांकियां इस धार्मिक आयोजन में नवीनता और भव्यता का समावेश करेंगी, जिससे दूर-दूर से श्रद्धालु इस अनुपम दृश्य का साक्षी बनने आएंगे। इस दिन भक्तजन भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और बेलपत्र, धतूरा, भांग आदि अर्पित कर उनकी कृपा प्राप्त करते हैं।

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महाशिवरात्रि 2026 पूजा विधि

  • प्रातःकाल उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • शिवलिंग पर जल या गंगाजल से अभिषेक करें।
  • इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें।
  • बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, सफेद पुष्प और चंदन अर्पित करें।
  • धूप, दीप जलाकर शिव चालीसा का पाठ करें और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
  • शिव आरती कर भगवान शिव से अपनी मनोकामना पूर्ण करने की प्रार्थना करें।
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महाशिवरात्रि पर्व का महत्व और शुभ काल

महाशिवरात्रि का यह पावन पर्व भगवान शिव और देवी पार्वती के विवाह का उत्सव है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने सृष्टि को बचाने के लिए विषपान किया था, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए। यह रात्रि महादेव की कृपा प्राप्त करने का सबसे उत्तम समय मानी जाती है। भक्तगण इस दिन उपवास रखकर, शिवजी का अभिषेक कर और मंत्रों का जाप कर अपनी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यह अवसर हमें भगवान शिव के त्याग, तपस्या और कल्याणकारी स्वरूप का स्मरण कराता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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विवरणजानकारी (17 फरवरी 2026)
महाशिवरात्रि तिथिफाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी
पूजा का समयरात्रि के चारों प्रहर में

शिव मंत्रों का जाप

ॐ नमः शिवाय॥
महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

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निष्कर्ष और उपाय

महाशिवरात्रि का यह पर्व हमें आध्यात्मिकता की गहराइयों में उतरने और भगवान शिव के दिव्य आशीर्वाद को प्राप्त करने का अवसर देता है। पहाड़ी मंदिर से निकलने वाली शिव बारात और कानपुर की झांकियां इस पर्व की भव्यता को और बढ़ा देंगी, जिससे श्रद्धालुओं में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार होगा। इस पावन दिवस पर सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ महादेव की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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