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CBSE News: सीबीएसई स्कूलों में ‘ग्रैंडपेरेंट्स डे’ से दूर होगी पीढ़ीगत दूरी, जानें क्या हैं नए दिशानिर्देश

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CBSE News: आज के तेजी से बदलते दौर में जहां पीढ़ीगत दूरियां बढ़ रही हैं, वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने एक अनूठी पहल की शुरुआत की है ताकि बच्चे अपने दादा-दादी और नाना-नानी से फिर से जुड़ सकें। दिल्ली शिक्षा विभाग ने सीबीएसई स्कूलों में ‘ग्रैंडपेरेंट्स डे’ मनाना अनिवार्य कर दिया है, जिसका उद्देश्य सिर्फ एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि परिवारों में भावनात्मक रिश्तों को मजबूत करना है।

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CBSE News: सीबीएसई स्कूलों में ‘ग्रैंडपेरेंट्स डे’ से दूर होगी पीढ़ीगत दूरी, जानें क्या हैं नए दिशानिर्देश

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CBSE News: सीबीएसई की नई पहल और इसके पीछे का विजन

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वर्तमान समय में समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है जनरेशन गैप। बदलती जीवनशैली, तेज तकनीक और व्यस्त दिनचर्या के कारण बच्चों और बुजुर्गों के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं। इसी दूरी को कम करने के लिए अब स्कूलों में एक नई पहल शुरू हो गई है। केंद्र सरकार और शिक्षा विभाग ने मिलकर बच्चों और उनके दादा-दादी, नाना-नानी के बीच रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में यह अहम कदम उठाया है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की दिशानिर्देशों के बाद दिल्ली शिक्षा विभाग ने सभी सीबीएसई स्कूलों में ‘ग्रैंडपेरेंट्स डे’ मनाने की शुरुआत की है। इस दिन बच्चे अपने दादा-दादी या नाना-नानी के साथ स्कूल आते हैं। स्कूल परिसर में पूरे दिन खास गतिविधियां होती हैं, जिनमें बच्चे और बुजुर्ग मिलकर हिस्सा लेते हैं। इसका मकसद सिर्फ एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि दिलों की दूरी को कम करना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

अंतर्राष्ट्रीय प्रेरणा से भारत में नई शुरुआत

यह अवधारणा (कॉन्सेप्ट) नया नहीं है। अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में ‘ग्रैंडपेरेंट्स डे’ या ‘ग्रैंडफ्रेंड्स डे’ काफी समय से मनाया जा रहा है। वहां इसके सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। बच्चों का अपने परिवार से जुड़ाव बढ़ा है और बुजुर्गों में अकेलेपन की भावना कम हुई है। अब भारत में भी इसी सोच को अपनाया जा रहा है, ताकि परिवार की जड़ें मजबूत हों और संस्कार पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ें। सीबीएसई का मानना है कि सिर्फ एक दिन का आयोजन पर्याप्त नहीं है। इसलिए बोर्ड ने संकेत दिए हैं कि सालभर इस सोच से जुड़ी गतिविधियां कराई जाएंगी। स्कूलों को कहा गया है कि वे पढ़ाई के साथ-साथ ऐसे कार्यक्रम रखें, जिनसे अलग-अलग पीढ़ियों के बीच बातचीत और समझ बढ़े।

‘ग्रैंडपेरेंट्स डे’ पर होने वाली प्रमुख गतिविधियां

‘ग्रैंडपेरेंट्स डे’ पर निम्नलिखित गतिविधियां आयोजित की जा सकती हैं:
* बच्चों और दादा-दादी की साझा कहानियां
* पुराने खेलों का आयोजन
* सांस्कृतिक कार्यक्रम
* अनुभव साझा करने के सत्र
* चित्रकला और लेखन जैसी रचनात्मक गतिविधियां
इन सबका मकसद यही है कि बच्चे अपने बुजुर्गों को समझें और उनसे जीवन के सबक सीखें।

राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक परिषद की सिफारिशों और सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के निर्देशों के तहत सीबीएसई ने ये दिशानिर्देश तैयार की हैं। स्कूलों से कहा गया है कि वे स्वतंत्रता दिवस, बाल दिवस और अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस जैसे मौकों पर भी दादा-दादी और नाना-नानी को आमंत्रित करें। इससे बच्चों और बुजुर्गों के बीच नियमित संपर्क बना रहेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें: लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें।

सम्मान और भावनात्मक समझ का विकास

बोर्ड का कहना है कि जब बच्चे अपने दादा-दादी के साथ समय बिताते हैं, तो उनमें सम्मान, धैर्य और नैतिक मूल्य अपने आप विकसित होते हैं। बुजुर्गों के अनुभव बच्चों को जीवन की सही दिशा दिखा सकते हैं। इससे बच्चों की भावनात्मक समझ भी बेहतर होती है। सीबीएसई ने स्कूलों को यह भी सुझाव दिया है कि वे ‘वॉकथॉन’ जैसे कार्यक्रम आयोजित करें। इसमें दादा-दादी और नाती-पोते या नाना-नानी और नातिनें साथ चलें। ऐसे कार्यक्रम न सिर्फ सेहत के लिए अच्छे होते हैं, बल्कि आपसी बातचीत और हंसी-मजाक का मौका भी देते हैं।

बुजुर्गों के अकेलेपन को कम करने में सहायक

आज कई बुजुर्ग अकेलेपन और सामाजिक दूरी की समस्या से जूझ रहे हैं। बच्चों के साथ समय बिताने से उनका मन खुश रहता है। स्कूलों की यह पहल वरिष्ठ नागरिकों को समाज से जोड़ने में भी मदद करेगी। उन्हें लगेगा कि उनकी मौजूदगी आज भी अहम है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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