
Grah Kalesh: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल और उनकी स्थिति हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। जब ये ग्रह अपनी अशुभ स्थिति में होते हैं, तो व्यक्ति को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिनमें पारिवारिक कलह और वैवाहिक जीवन में अशांति प्रमुख है।
गृह क्लेश: कुंडली में अशांति का कारण बनने वाले अशुभ योग और उनके ज्योतिषीय प्रभाव
कुंडली में गृह क्लेश के प्रमुख ज्योतिषीय योग और उनके संकेत
हमारे प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों में ऐसे कई योगों का वर्णन मिलता है, जो जातक के दांपत्य और पारिवारिक जीवन में उथल-पुथल मचा सकते हैं। इन्हीं में से एक है ‘कलह योग’, जिसका निर्माण कुंडली में चंद्रमा और राहु की विशेष **ग्रह स्थिति** से होता है। जब कुंडली के पंचम भाव (संतान, प्रेम और बुद्धि का भाव) या अष्टम भाव (दीर्घायु, बाधाएं और गुप्त विद्या का भाव) में चंद्रमा और राहु एक साथ विराजमान हों, तो यह अत्यंत अशुभ ‘कलह योग’ का निर्माण करता है। इस योग के प्रभाव से दांपत्य जीवन में कटुता आती है, पति-पत्नी के बीच अनावश्यक विवाद होते हैं, और परिवार में शांति भंग हो जाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्रमा मन का कारक है, जबकि राहु भ्रम और माया का ग्रह है। इन दोनों की युति से मन अशांत और चंचल हो जाता है, जिससे व्यक्ति सही निर्णय लेने में सक्षम नहीं हो पाता। यही नहीं, चंद्रमा के साथ शनि, मंगल या राहु की युति भी जातक की निर्णय क्षमता को कमजोर करती है। शनि की युति व्यक्ति को निराशावादी बनाती है, मंगल की युति क्रोध और आक्रामकता बढ़ाती है, और राहु की युति भ्रम पैदा करती है। इन ग्रहों के अशुभ प्रभाव के कारण घर में लगातार विवादों और वैचारिक मतभेदों का सिलसिला चलता रहता है। यह स्थिति न केवल मानसिक तनाव का कारण बनती है, बल्कि रिश्तों में दरार भी डाल सकती है।
ज्योतिषीय गणनाएं बताती हैं कि ऐसे योगों का जीवन पर गहरा असर होता है, परंतु उचित उपायों से इनकी तीव्रता को कम किया जा सकता है। इन अशुभ **ग्रह स्थिति** के निवारण हेतु वैदिक मंत्रों का जाप, संबंधित ग्रहों की शांति हेतु पूजा-अर्चना और योग्य ज्योतिषी से सलाह अत्यंत लाभकारी सिद्ध होती है। मानसिक शांति और पारिवारिक सौहार्द के लिए चंद्रमा और राहु से संबंधित दोषों का निवारण आवश्यक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
ऐसे में, नियमित रूप से भगवान शिव की आराधना करना और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है, क्योंकि चंद्रमा शिवजी के मस्तक पर सुशोभित हैं। राहु के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ और राहु मंत्र का जाप भी अत्यंत प्रभावी होता है। पारिवारिक जीवन में मधुरता लाने के लिए आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1, गौ सेवा और दान-पुण्य के कार्य भी करने चाहिए।
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