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मार्च, 16, 2026
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Indian Airlines News: सावधान! भारत में आधे विमान ‘तकनीकी रूप से बीमार’, एयर इंडिया की हालत सबसे खराब, क्या सुरक्षित है हवाई सफर?

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Indian Airlines News: भारतीय आसमान में उड़ान भरना अब कहीं डरावना तो नहीं हो चला है? क्या आसमान की ये बुलंदियां कभी भी ज़मीन पर ला पटक सकती हैं? केंद्र सरकार के चौंकाने वाले आंकड़ों ने देश की हवाई सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Indian Airlines News: सावधान! भारत में आधे विमान ‘तकनीकी रूप से बीमार’, एयर इंडिया की हालत सबसे खराब, क्या सुरक्षित है हवाई सफर?

Indian Airlines News: आधे बेड़े में लगातार खराबी, सरकारी रिपोर्ट ने उड़ाई नींद

भारतीय हवाईअड्डों से उड़ान भरने वाले हर दूसरे विमान की तकनीकी हालत संतोषजनक नहीं है। केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में पेश किए गए चौंकाने वाले आंकड़ों ने भारतीय एयरलाइन्स के बेड़े की सुरक्षा और उनके रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी डेटा के अनुसार, देश के कुल विमानों में से आधे विमान बार-बार तकनीकी खामियों से जूझ रहे हैं, जो कभी भी किसी बड़े हादसे का सबब बन सकती हैं। इस सूची में एयर इंडिया समूह की स्थिति सबसे चिंताजनक है, जिसके 72 फीसदी विमानों में बार-बार खराबी दर्ज की गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ये आंकड़े देश की विमान सुरक्षा पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाते हैं। सरकार ने सदन को बताया कि पिछले साल जनवरी से देश की छह सूचीबद्ध एयरलाइन्स के कुल 754 विमानों का गहन विश्लेषण किया गया। इनमें से 377 विमानों में लगातार तकनीकी खराबी पाई गई, जिसने विमानन उद्योग में हड़कंप मचा दिया है।

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विमानन मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के सबसे ज़्यादा विमानों की समीक्षा की गई। नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने सदन को लिखित जवाब में बताया कि 3 फरवरी तक इंडिगो के कुल 405 विमानों का विश्लेषण किया गया, जिनमें से 148 में बार-बार खराबी दर्ज की गई। वहीं, एयर इंडिया समूह का अनुपात कहीं ज़्यादा था। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के कुल 267 विमानों की जांच में से 191 में लगातार समस्याएँ पाई गईं, जो जांचे गए बेड़े का लगभग 72 प्रतिशत है। डेटा से यह भी सामने आया कि एयर इंडिया के 166 विमानों में से 137 विमानों में बार-बार तकनीकी खामियां थीं, जबकि एयर इंडिया एक्सप्रेस के 101 विमानों में से 54 में भी इसी तरह की खराबी पाई गई। अन्य एयरलाइन्स भी इस गंभीर सूची में शामिल थीं; स्पाइसजेट के 43 विमानों के विश्लेषण में से 16 में बार-बार खराबी पाई गई, जबकि अकासा एयर के 32 विमानों में से 14 विमानों में खराबी दर्ज की गई। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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तकनीकी खराबी: कितनी गंभीर, कितनी सामान्य?

इन चौंकाने वाले आंकड़ों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए, एयर इंडिया के एक प्रवक्ता ने स्पष्टीकरण दिया कि एयरलाइन ने “अत्यधिक सावधानी” बरतते हुए अपने पूरे बेड़े में बड़े पैमाने पर तकनीकी जांच की है, जिसके कारण गड़बड़ियों की संख्या में इज़ाफ़ा हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि हमने अत्यधिक सावधानी बरतते हुए अपने पूरे बेड़े में जांच की है। इसलिए, संख्याएँ ज़्यादा दिख रही हैं। एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी बताया कि ये निष्कर्ष ज़्यादातर कम प्राथमिकता वाले उपकरणों से संबंधित हैं। विमान प्रणालियों को तात्कालिकता के आधार पर A से D श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, जिसमें एयर इंडिया की अधिकांश समस्याएँ श्रेणी D में आती हैं। अधिकारी ने बताया, “एयर इंडिया के मामले में, अधिकांश समस्याएँ श्रेणी D में हैं, जिसमें सीटें, ट्रे टेबल, स्क्रीन (सीटों के पीछे) और इसी तरह की चीज़ें शामिल हैं। ये सीधे तौर पर विमान की सुरक्षा से संबंधित नहीं हैं।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

एयरलाइन ऑडिट के साथ-साथ, विमानन नियामक डीजीसीए (DGCA) ने पिछले साल अपनी निगरानी गतिविधियों को भी काफी बढ़ा दिया था। मंत्री मोहोल ने जानकारी दी कि नियामक ने योजनाबद्ध निगरानी के तहत 3,890 सर्विलांस इंस्पेक्शन, 56 रेगुलेटरी ऑडिट, 84 विदेशी एयरक्राफ्ट की निगरानी (SOFA) चेक और 492 रैंप इंस्पेक्शन किए। इसके अतिरिक्त, डीजीसीए ने बिना किसी पूर्व योजना के तहत 874 स्पॉट चेक और 550 नाइट इंस्पेक्शन भी किए। मैनपावर की कमी के बारे में मंत्री ने बताया कि 2022 में डीजीसीए में 637 स्वीकृत टेक्निकल पद थे। स्टाफ की कमी को दूर करने और परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए, विभाग का पुनर्गठन किया गया है और स्वीकृत टेक्निकल पदों की संख्या बढ़ाकर 1,063 कर दी गई है।

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