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फ़रवरी, 13, 2026
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Grahan 2026: ग्रहण काल में मंत्र जाप से पाएं अद्भुत शक्ति और आध्यात्मिक शांति

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Grahan 2026: ज्योतिषीय गणनाओं और धर्म शास्त्रों के अनुसार ग्रहण काल को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यह वह विशेष समय होता है जब ब्रह्मांडीय ऊर्जा अपने चरम पर होती है, और इस दौरान किए गए आध्यात्मिक कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है। विशेषकर मंत्र जाप के लिए यह अवधि अत्यंत शुभ फलदायी मानी जाती है।

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Grahan 2026: ग्रहण काल में मंत्र जाप से पाएं अद्भुत शक्ति और आध्यात्मिक शांति

Grahan 2026 में मंत्र सिद्धि का रहस्य और लाभ

ग्रहण काल का संबंध खगोलीय घटनाओं से है, लेकिन इसका आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व भी कम नहीं है। ऐसी मान्यता है कि इस विशेष अवधि में, जब सूर्य या चंद्रमा पर ग्रहण का प्रभाव होता है, तब हमारी प्रार्थनाएं और मंत्र सामान्य दिनों की तुलना में शीघ्र फलित होते हैं। यह समय आत्मचिंतन, ध्यान और आराध्य देव के मंत्रों के उच्चारण के लिए सर्वोत्तम है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस दौरान किए गए मंत्र जाप से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है, ग्रहों के दुष्प्रभाव शांत होते हैं और जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है। यह अवधि उन साधकों के लिए वरदान है जो तीव्र मंत्र सिद्धि प्राप्त करना चाहते हैं।

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ग्रहण काल में मंत्र जाप की सही विधि

ग्रहण के स्पर्श काल से लेकर मोक्ष काल तक मंत्र जाप करना चाहिए। इस दौरान पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। किसी भी मंत्र का जाप करते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और विश्वास हो।

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* ग्रहण शुरू होने से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
* अपने आराध्य देव का स्मरण करें और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें।
* जिस भी मंत्र का जाप करना चाहते हैं, उसे मानसिक रूप से या धीमी ध्वनि में करें।
* ग्रहण काल के उपरांत पुनः स्नान करें और दान-पुण्य करें।

यह सर्वविदित है कि ग्रहण काल में की गई साधना का प्रभाव अन्य समय की तुलना में कई गुना अधिक होता है। ज्योतिषीय ग्रंथों में कहा गया है कि इस समय यदि आप किसी विशेष कामना की पूर्ति हेतु मंत्र जाप करते हैं, तो वह कामना अति शीघ्र पूर्ण होती है। यह न केवल आध्यात्मिक उत्थान का मार्ग प्रशस्त करता है, बल्कि मानसिक शांति और एकाग्रता में भी वृद्धि करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस अवधि में किए गए कर्मों का फल सीधे हमारे कर्मफल से जुड़ता है, जिससे जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और नकारात्मक ऊर्जा का शमन होता है। मंत्र सिद्धि के लिए यह एक सुनहरा अवसर है।

इस दौरान आप अपने गुरु द्वारा प्रदत्त मंत्र का जाप कर सकते हैं या किसी भी सिद्ध मंत्र का उच्चारण कर सकते हैं।

ॐ नमः शिवाय।
महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।
गायत्री मंत्र: ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।।

ग्रहण का समय भय का नहीं, बल्कि साधना और पुण्य संचय का होता है। इस पवित्र अवधि का सदुपयोग कर हम अपने जीवन को नई दिशा दे सकते हैं। ग्रहण के पश्चात स्नान कर अन्न, वस्त्र या धन का दान अवश्य करें। ऐसा करने से ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ग्रहण काल में किया गया मंत्र जाप व्यक्ति को आंतरिक शक्ति प्रदान करता है और उसे जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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