



Mahashivratri 2026: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का महापर्व है, जो भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष का द्वार खोलता है।
महाशिवरात्रि 2026: बिहार के दिव्य शिवधामों में करें महादेव का पूजन
Mahashivratri 2026 का पावन अवसर शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। यह वह दिन है जब देवों के देव महादेव और आदिशक्ति मां पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था, और इस शुभ घड़ी में की गई पूजा-अर्चना अनंत फलदायी होती है। बिहार की धरती अनादिकाल से ही आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र रही है, जहां कई ऐसे प्राचीन और दिव्य शिवालय स्थित हैं, जो महाशिवरात्रि पर शिव-शक्ति के अनुपम स्वरूप के दर्शन और पूजन के लिए भक्तों को आकर्षित करते हैं। इन पवित्र स्थानों पर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक से मन को असीम शांति मिलती है और आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
महाशिवरात्रि 2026: बिहार के पौराणिक शिवधामों की महिमा
बिहार के ये दिव्य शिव धाम न केवल हमारी गौरवशाली विरासत के प्रतीक हैं, बल्कि महाशिवरात्रि पर आध्यात्मिक ऊर्जा के अक्षय स्रोत भी बन जाते हैं। इन पवित्र स्थानों पर श्रद्धापूर्वक किया गया दर्शन और पूजन भक्तों के जीवन में सुख-शांति का संचार कराता है। यहां की मिट्टी में शिवत्व की ऐसी सुगंध है कि हर कण में महादेव का वास प्रतीत होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। महाशिवरात्रि के दिन इन मंदिरों में हजारों की संख्या में श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करते हैं।
महाशिवरात्रि का महत्व और पूजन विधि
महाशिवरात्रि का पर्व अंधकार और अज्ञानता को दूर कर प्रकाश और ज्ञान की ओर बढ़ने का प्रतीक है। यह भगवान शिव के ‘तांडव’ नृत्य की रात भी मानी जाती है, जब वे ब्रह्मांड के सृजन, संरक्षण और विनाश का संतुलन बनाए रखते हैं। इस दिन व्रत रखने, शिव लिंग पर जलाभिषेक करने और रात्रि जागरण करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी कष्टों को दूर करते हैं।
महाशिवरात्रि पर शिव पूजन की विधि इस प्रकार है:
- प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- हाथ में जल लेकर शिव-पार्वती की पूजा का संकल्प करें।
- शिवलिंग पर शुद्ध जल, गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और गन्ने के रस से जलाभिषेक या रुद्राभिषेक करें।
- बेलपत्र, धतूरा, भांग, आंकड़े के फूल, चंदन, अक्षत और फल-मिठाई अर्पित करें।
- शिवजी को तिलक लगाएं और धूप-दीप प्रज्वलित करें।
- महाशिवरात्रि व्रत कथा का पाठ करें और शिव चालीसा का वाचन करें।
- ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का यथाशक्ति जप करें।
- अंत में शिवजी की आरती करें और प्रसाद वितरण करें।
मंत्रोच्चार से प्राप्त करें शिव कृपा
महाशिवरात्रि के दिन महामृत्युंजय मंत्र का जप विशेष फलदायी होता है। यह मंत्र अकाल मृत्यु के भय को दूर कर आरोग्य और दीर्घायु प्रदान करता है:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
महाशिवरात्रि का यह पावन पर्व हमें भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त करने का अवसर देता है। बिहार के इन शिवधामों में जाकर या घर पर ही सच्चे मन से की गई पूजा-अर्चना जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि लाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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