

Darbhanga News: न्याय का तराजू जब सिर्फ सजा नहीं, बल्कि समाज के लिए भी कुछ तौल दे, तो फैसले नजीर बन जाते हैं। दरभंगा की एक अदालत ने कुछ ऐसा ही किया है, जहां एक महिला को जमानत देने के लिए एक ऐसी शर्त रखी गई, जिसकी चर्चा अब हर तरफ हो रही है।
Darbhanga News: जानिए क्या है पूरा मामला और अदालत का अभूतपूर्व आदेश
दरभंगा जिला उत्पाद अधिनियम के प्रथम विशेष न्यायाधीश श्रीराम झा की अदालत ने एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सदर थाना क्षेत्र के सारामोहनपुर की रहने वाली चनिया देवी को जमानत देते हुए अदालत ने एक अनूठी शर्त रखी। न्यायाधीश ने आरोपी महिला पर छह हजार रुपये का अर्थदंड लगाया और निर्देश दिया कि इस राशि को दो हिस्सों में जमा किया जाए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। बिहार में लागू शराबबंदी कानून के तहत यह मामला दर्ज किया गया था।
अदालत के आदेश के अनुसार, अर्थदंड की राशि में से तीन हजार रुपये जिला विधिक सेवा प्राधिकार, दरभंगा के कार्यालय में और शेष तीन हजार रुपये दरभंगा बार एसोसिएशन के खाते में जमा करने थे। यह आदेश बहादुर सहनी की पत्नी चनिया देवी के जीओ वाद संख्या 10325/22 में पारित किया गया। इस तरह के फैसले न्याय व्यवस्था में एक नई मिसाल कायम करते हैं।
वकीलों ने की फैसले की सराहना
अभियुक्त चनिया देवी के वकील रामकृष्ण ठाकुर ने अदालत की शर्त का तुरंत पालन किया। उन्होंने निर्धारित राशि दोनों संस्थानों के खातों में जमा कर दी और उसकी रसीदें जमानत बंधपत्र के साथ न्यायालय में प्रस्तुत कीं। अदालत ने इसे स्वीकार करते हुए अभियुक्त को जमानत पर रिहा कर दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस फैसले ने न केवल आरोपी को राहत दी, बल्कि दो महत्वपूर्ण संस्थाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने में भी मदद की।
विशेष न्यायाधीश श्रीराम झा के इस आदेश की जिला बार एसोसिएशन के वकीलों ने जमकर सराहना की है। 47 वर्षों से वकालत कर रहे रामवृक्ष सहनी और अधिवक्ता विजय नारायण चौधरी सहित दर्जनों वकीलों ने कहा कि यह फैसला बार एसोसिएशन के हित में है और यह न्यायपालिका की सकारात्मक सोच को दर्शाता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस तरह के रचनात्मक न्यायिक आदेश समाज में एक अच्छा संदेश देते हैं।



