
PM Modi Retirement Age: सियासत के अखाड़े में उम्र अक्सर एक ख़ामोश सवाल बनकर खड़ी हो जाती है, खासकर तब जब फैसले भविष्य की दिशा तय करते हों। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम में अपनी आयु का जिक्र किया, तो न सिर्फ छात्रों को एक सीख मिली, बल्कि देश की राजनीतिक गलियारों में एक पुरानी बहस फिर से जीवंत हो उठी।
PM Modi Retirement Age: क्या भाजपा की ’75 साल’ वाली परंपरा इतिहास बन जाएगी? पीएम मोदी के बयान से छिड़ी नई बहस
PM Modi Retirement Age: भाजपा की उम्र संबंधी नीति पर फिर क्यों उठी चर्चा?
PM Modi Retirement Age: सियासत के अखाड़े में उम्र अक्सर एक ख़ामोश सवाल बनकर खड़ी हो जाती है, खासकर तब जब फैसले भविष्य की दिशा तय करते हों। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम में अपनी आयु का जिक्र किया, तो न सिर्फ छात्रों को एक सीख मिली, बल्कि देश की राजनीतिक गलियारों में एक पुरानी बहस फिर से जीवंत हो उठी। दरअसल, प्रधानमंत्री ने पिछले साल सितंबर में अपने 75वें जन्मदिन का उल्लेख करते हुए एक फोन कॉल का जिक्र किया, जिसने उनकी उम्र को लेकर चल रही अटकलों को फिर से हवा दे दी।
प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्हें एक नेता का फोन आया था, जिसने याद दिलाया कि वे 75 वर्ष के हो चुके हैं। इस पर पीएम मोदी का जवाब था कि ‘अभी 25 वर्ष बाकी हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि वे बीते हुए वर्षों को गिनने के बजाय आने वाले वर्षों को गिनना पसंद करते हैं। यह बातचीत केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल द्वारा ऑनलाइन साझा किए गए वीडियो में सामने आई, जिसके बाद भाजपा की उस अनौपचारिक प्रथा पर बहस फिर से तेज हो गई, जिसमें 75 वर्ष की आयु के बाद नेताओं के पद छोड़ने की बात कही जाती है।
यह परंपरा भाजपा के भीतर कई वरिष्ठ नेताओं के लिए लागू की गई है, हालांकि कुछ अपवाद भी रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह अनौपचारिक नियम अब भी पार्टी में लागू होगा, विशेषकर तब जब वे अपना वर्तमान कार्यकाल पूरा करेंगे और 79 वर्ष के हो जाएंगे। कई वरिष्ठ नेताओं ने संकेत दिया है कि प्रधानमंत्री 2029 में भी राजग के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
आरएसएस प्रमुख के बयान से विपक्षी दलों में हलचल
इस बहस को तब और बल मिला जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने जुलाई 2025 में नागपुर में एक पुस्तक विमोचन समारोह में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने आरएसएस के दिवंगत विचारक मोरोपंत पिंगले के उस विनोदी कथन का जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि 75 वर्ष की आयु में दी जाने वाली शॉल अक्सर सेवानिवृत्ति का प्रतीक होती है। चूंकि भागवत और प्रधानमंत्री मोदी दोनों सितंबर 2025 में 75 वर्ष के हो जाएंगे, इसलिए विपक्षी दलों ने इस टिप्पणी को एक संभावित संकेत के रूप में देखा और कयासों का बाजार गर्म हो गया।
विपक्षी दलों के नेताओं ने अतीत के उन उदाहरणों को उजागर किया, जब लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और जसवंत सिंह जैसे वरिष्ठ भाजपा नेताओं को 75 वर्ष की आयु पार करने के बाद सक्रिय राजनीति से हटकर मार्गदर्शक मंडल में शामिल किया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वही सिद्धांत अब भी लागू होगा, या प्रधानमंत्री मोदी के लिए अलग मापदंड अपनाए जाएंगे। यह चर्चा तब और गंभीर हो जाती है जब पार्टी के भीतर कई नेताओं के लिए उम्र की यह सीमा लागू होती रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
हालांकि, भाजपा नेतृत्व ने प्रधानमंत्री मोदी के इस्तीफे की किसी भी संभावना को लगातार खारिज किया है और साफ किया है कि पार्टी का सर्वोच्च नेतृत्व उनके साथ है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/ यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री अपनी आयु को एक बाधा नहीं मानते और भविष्य की ओर देखते हुए देश के लिए काम करने को प्रतिबद्ध हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



