
Bihar Census 2026: बिहार के सियासी गलियारों में एक नई गिनती की दस्तक, जो न सिर्फ लोगों का शुमार करेगी, बल्कि प्रदेश की तस्वीर भी संवारेगी। राज्य सरकार ने बहुप्रतीक्षित जनगणना की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है, जिससे लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने शनिवार को इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि बिहार में यह जनगणना दो चरणों में पूरी की जाएगी। यह कदम राज्य के विकास और नीति निर्माण के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि सटीक आंकड़ों से विकास योजनाओं को सही दिशा मिल सकेगी।
Bihar Census 2026: क्या है पूरा प्लान?
उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के अनुसार, जनगणना की प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए विस्तृत योजना तैयार की गई है। पहले चरण में मकानों की सूचीकरण और उनकी गणना की जाएगी, जबकि दूसरे चरण में जनसंख्या की वास्तविक गणना की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता पर विशेष जोर दिया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
राज्य में पहले भी जातीय जनगणना कराई जा चुकी है, जिसके आंकड़े सार्वजनिक किए गए थे और जिसका राजनीतिक गलियारों में खासा प्रभाव देखने को मिला था। आगामी जनगणना में भी आंकड़ों का गहन विश्लेषण कर विकास की रणनीति तैयार की जाएगी।
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जनगणना के दो चरण और उनका महत्व
बिहार में होने वाली इस जनगणना के दो चरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। पहला चरण, जिसमें मकानों और आवासीय इकाइयों का विस्तृत विवरण एकत्र किया जाएगा, विकास योजनाओं के लिए आधारभूत ढांचा प्रदान करेगा। इससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आवास की स्थिति, बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकेगी। यह भी एक प्रकार की जातीय जनगणना थी।
दूसरा चरण, जिसमें व्यक्तियों की गणना होगी, जनसंख्या के विभिन्न पहलुओं जैसे आयु, लिंग, शिक्षा, व्यवसाय और सामाजिक-आर्थिक स्थिति के बारे में व्यापक डेटा उपलब्ध कराएगा। ये आंकड़े सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में प्रभावी नीतियां बनाने में मदद करेंगे। इस प्रकार, यह जनगणना सिर्फ संख्याएं गिनने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बिहार के भविष्य की रूपरेखा तैयार करने का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





